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5000 Km दूर खामेनेई के लिए आंसू और सिर्फ 500 M दूर सूर्या के लिए खामोशी? वायरल वीडियो ने छेड़ दी बड़ी बहस

Up news: सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। एक तरफ एक महिला कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को लेकर भावुक होकर रोती दिखाई देती है और कहती है कि “हमारे खामेनेई को धोखे से मार दिया गया।” वहीं दूसरी तरफ गाजियाबाद के चर्चित सूर्या हत्याकांड को लेकर स्थानीय लोगों से सवाल पूछे जाते हैं तो कई लोग जवाब देने से बचते या अनभिज्ञता जताते नजर आते हैं। यही विरोधाभास अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है।

5000 किलोमीटर दूर के लिए दर्द, 500 मीटर दूर पर सन्नाटा?

वायरल पोस्ट का संदेश सीधा है। सवाल यह नहीं कि किसी विदेशी नेता के लिए सहानुभूति क्यों है। सवाल यह है कि क्या अपने शहर, अपने मोहल्ले और अपने आसपास हुई घटनाओं पर भी उतनी ही संवेदनशीलता दिखाई जा रही है? सोशल मीडिया पर हजारों लोग पूछ रहे हैं कि अगर इंसाफ और मानवता की बात की जाती है तो फिर सूर्या की हत्या पर उतनी मुखर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखाई दे रही जितनी दुनिया के दूसरे मुद्दों पर दिखाई देती है।

Up news: सवाल मुस्लिम समाज से भी पूछा जा रहा है

ऑनलाइन बहस में कई यूजर्स सीधे मुस्लिम समाज से सवाल पूछ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अपराधी का कोई धर्म नहीं होता, तो फिर सूर्या हत्याकांड की खुलकर निंदा करने में हिचकिचाहट क्यों दिखाई दे रही है? क्या समाज के जिम्मेदार लोगों को आगे आकर यह नहीं कहना चाहिए कि किसी निर्दोष की हत्या अस्वीकार्य है, चाहे आरोपी कोई भी हो?

Up news: खामोशी ही बहस का केंद्र बन गई

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा किसी बयान की नहीं, बल्कि कथित खामोशी की हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि जब किसी घटना पर आवाज उठाई जाती है और दूसरी घटना पर सन्नाटा छा जाता है, तब सवाल पैदा होना स्वाभाविक है।

दोहरे मापदंड का आरोप

Up news: वायरल पोस्ट और वीडियो के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि समाज के कुछ वर्गों में संवेदनाएं और आक्रोश भी चुनिंदा मुद्दों के लिए ही दिखाई देते हैं। यही वजह है कि “खामेनेई के लिए आंसू, सूर्या के लिए खामोशी” वाला नैरेटिव तेजी से फैल रहा है और लोगों के बीच बहस को और तेज कर रहा है। अब सवाल सिर्फ सूर्या हत्याकांड का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या इंसाफ, संवेदना और मानवता के पैमाने सभी के लिए एक जैसे हैं, या फिर वे भी पहचान देखकर बदल जाते हैं?

 

 

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