UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की पूर्व प्रेमिका डॉ. रोहिणी घावरी ने समाजवादी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में उतरने का संकेत दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी बातचीत सपा प्रमुख अखिलेश यादव से हो चुकी है।
200 सभाओं की तैयारी
रोहिणी घावरी जून में स्विट्जरलैंड से भारत लौटेंगी और पूरे यूपी में करीब 200 छोटी-बड़ी सभाएं करेंगी। इसके बाद लखनऊ या आगरा में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें अखिलेश यादव मुख्य अतिथि हो सकते हैं।
UP Politics: नॉन-जाटव दलितों पर फोकस
रोहिणी का कहना है कि वे खासकर वाल्मीकि, पासी और अन्य नॉन-जाटव दलित समाज को एकजुट करने का काम करेंगी। उनके मुताबिक, अब तक दलित राजनीति में सिर्फ जाटव समाज को ज्यादा लाभ मिला है, जबकि अन्य उपजातियां पीछे रह गई हैं।
चंद्रशेखर पर साधा निशाना
उन्होंने संकेत दिया कि वे यूपी में जाकर “कथित दलित आंदोलन” की सच्चाई भी सामने लाएंगी, जिसे चंद्रशेखर आजाद चला रहे हैं। इससे साफ है कि उनकी एंट्री सीधे तौर पर चंद्रशेखर की राजनीति को चुनौती दे सकती है।
UP Politics: 6 मुद्दों पर बनी सहमति
रोहिणी और अखिलेश यादव के बीच दलित समाज को प्रतिनिधित्व देने, वाल्मीकि समाज को टिकट, सफाई कर्मचारियों के लिए सुविधाएं, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार, मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म करने और SC/ST एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे 6 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी है।
सपा का रुख
सपा की ओर से इस पहल का स्वागत किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने की कोशिश जारी है और जो भी पीड़ित वर्ग से आता है, उसका स्वागत है।
UP Politics: राजनीतिक असर
रोहिणी घावरी की एंट्री से यूपी की दलित राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इससे अखिलेश यादव को नया चेहरा मिलता है या चंद्रशेखर आजाद की राजनीति पर असर पड़ता है।
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