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होर्मुज स्ट्रेट में सेवा शुल्क वसूल करेगा ईरान, क्या है ईरान की योजना ?

us-iran deal: होर्मुज स्ट्रेट में सेवा शुल्क वसूल करेगा ईरान, क्या है ईरान की योजना ?

us-iran deal: ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी संघर्ष के बाद शांति समझौता हो गया है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के अनुसार ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा।होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा।होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की खबर दुनिया के लिए बहुत अच्छी है, लेकिन समझौते के तुरंत बाद ही ईरान ने दुनिया के लोगों को फिर से आश्चर्यचकित कर दिया है।

सेवा शुल्क के तौर पर लिया जाएगा टैक्स

हालांकि ईरान का कहना है कि शांति समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर शुरुआती 60 दिनों में कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद वह सेवा शुल्क वसूल करेगा।यह शुल्क जहाजों को दी जाने वाली सुविधाओं और सेवाओं के तौर पर लिया जाएगा।ईरान के इस स्टैंड को समझौते से यू-टर्न और ट्रंप को झटके के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आता है और इस क्षेत्र में अब युद्ध-पूर्व जैसी स्थिति वापस नहीं लौटेगी। 

 

us-iran deal: कितना लिया जाएगा शुल्क ?

ईरान लगभग $1 प्रति बैरल का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है।अगर होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर प्रति बैरल तेल पर लगभग एक डॉलर के बराबर शुल्क लगाया जाता है, तो ईरान को भारी राजस्व मिलेगा। युद्ध के दौरान भी तेहरान ने कथित तौर पर इस रूट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल किया था, जिससे उसको लगभग 20 लाख डॉलर की कथित कमाई भी हुई थी।

us-iran deal: अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ेगा असर

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत समुद्री तेल और 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार इसी मार्ग से होता है। जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देशों का अधिकांश तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है।ऐसे में यहां शुल्क व्यवस्था लागू होने का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।