Home » अंतर्राष्ट्रीय » ईरान का सख्त रुख, नाकेबंदी हटे बिना नहीं खुलेगा होर्मुज, इस्लामाबाद में बातचीत संभव

ईरान का सख्त रुख, नाकेबंदी हटे बिना नहीं खुलेगा होर्मुज, इस्लामाबाद में बातचीत संभव

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा

US Iran War Ceasefire: ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोला जाएगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के अनुसार, जब तक युद्धविराम का उल्लंघन जारी है, तब तक इस रास्ते को खोलना संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रहा है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। गालिबाफ का कहना है कि जब तक यह नाकेबंदी खत्म नहीं होगी, तब तक पूर्ण युद्धविराम भी संभव नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की संभावना जताई जा रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देश फिर से बातचीत शुरू कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी संकेत दिया है कि यह बैठक जल्द हो सकती है।

US Iran War Ceasefire: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई

पिछले चौबीस घंटे के बड़े घटनाक्रम

पिछले चौबीस घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर लगी पाबंदियों में दी गई छूट को तीस दिन के लिए बढ़ा दिया है, ताकि तेल की कमी से जूझ रहे देशों को राहत मिल सके। ट्रम्प ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने की बात कही, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अंदर नेतृत्व में एकजुटता की कमी है। वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक किसी भी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है, जब तक नाकेबंदी खत्म नहीं होती। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों को जब्त कर लिया और पहले उन पर गोलीबारी भी की गई। इसी बीच जर्मनी की बड़ी एयरलाइन लुफ्थांसा ने बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण बीस हजार उड़ानें रद्द करने का फैसला लिया है।

US Iran War Ceasefire: लेबनान में पत्रकार की मौत

लेबनान में इजराइली हवाई हमले में पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई। वह पिछले बीस वर्षों से अल-अखबार के लिए काम कर रही थीं और इजराइल तथा हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष को कवर कर रही थीं। हमले के समय वह एक घर में शरण लेकर बैठी थीं, लेकिन उसी घर पर दोबारा हमला हुआ और वह मलबे के नीचे दब गईं। बाद में उनका शव निकाला गया। इजराइल का कहना है कि उस क्षेत्र में कुछ लोगों ने युद्धविराम का उल्लंघन किया था, जिससे उसके सैनिकों को खतरा हुआ। हालांकि उसने यह भी कहा कि वह पत्रकारों को निशाना नहीं बनाता। इस वर्ष लेबनान में अब तक नौ पत्रकारों की मौत हो चुकी है।

ईरानी दूतावास का एआई वीडियो और तंज

हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बना वीडियो साझा किया, जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प के युद्धविराम बढ़ाने के फैसले पर तंज कसा गया है। इस वीडियो में ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य नेताओं को बातचीत की मेज पर ईरान के प्रतिनिधियों का इंतजार करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता पर आरोप

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज में अस्थिरता के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने दोनों देशों पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन हमलों की निंदा करने की अपील की। उनका कहना है कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कदम उठा रहा है और इसके परिणामों की जिम्मेदारी हमलावर देशों की होगी।

भारत की रिकॉर्ड

यूरिया खरीद
यूरिया खरीद

भारत एक साथ पच्चीस लाख टन यूरिया आयात करने जा रहा है। इसका कारण ईरान युद्ध के चलते सप्लाई में आई कमी है। इसमें से पंद्रह लाख टन यूरिया पश्चिमी तट जैसे गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों पर पहुंचेगा, जबकि दस लाख टन पूर्वी तट जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में आएगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और इस बड़े आयात से वैश्विक कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

बारूदी सुरंग और सुरक्षा चिंताएं

अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन का अनुमान है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने में लगभग छह महीने लग सकते हैं। इस बीच तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध अब मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर यूरोप तक पहुंच रहा है, जिससे ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

ईरान में क्षतिग्रस्त इमारत
ईरान में क्षतिग्रस्त इमारत

US Iran War Ceasefire: ईरान की कानूनी तैयारी

ईरान ने अपने वैज्ञानिक संस्थानों पर हुए हमलों का रिकॉर्ड तैयार करना शुरू कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। सरकार के अनुसार बीस से अधिक विश्वविद्यालयों को नुकसान हुआ है और कई शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। इसे देश के भविष्य और ज्ञान व्यवस्था पर हमला बताया गया है।

US  के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी।
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी।

अमेरिका में सैन्य बदलाव और राजनीतिक घटनाएं

अमेरिका में नौसेना सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया गया है, जबकि इससे पहले सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को भी हटाया जा चुका है। यह बदलाव ऐसे समय पर हुए हैं जब अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त रणनीति अपना रहा है। वहीं पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने दावा किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान पर हमले की योजना को पहले कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ठुकराया था, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने उसे मंजूरी दी।

राष्ट्रपति ट्रम्प बुधवार को व्हाइट हाउस कार्यक्रम में शामिल हुए
राष्ट्रपति ट्रम्प बुधवार को व्हाइट हाउस कार्यक्रम में शामिल हुए

समुद्री तनाव, नाटो सूची और तेल की कीमतें

समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। पनामा ने अपने झंडे वाले जहाज को जब्त करने का विरोध किया है। अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को रोका है और अब तक इकतीस जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है। इसी बीच ट्रम्प प्रशासन ने नाटो देशों की एक सूची तैयार की है, जिसमें सहयोग के आधार पर देशों को बांटा गया है। अमेरिकी सीनेट ने ट्रम्प की युद्ध शक्ति को सीमित करने वाला प्रस्ताव भी खारिज कर दिया। इन सब घटनाओं के बीच तेल की कीमतों में करीब चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

नाकेबंदी, धमाके और बातचीत की उम्मीद

अमेरिका ने तेरह अप्रैल दो हजार छब्बीस से ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू की है, जो ओमान सागर, अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू है। इसका उद्देश्य ईरान के समुद्री व्यापार को रोकना है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकियां और दबाव इसमें रुकावट बन रहे हैं। इसी बीच तेहरान में धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि शुक्रवार तक शांति वार्ता को लेकर अच्छी खबर आ सकती है, जबकि पाकिस्तान के अधिकारियों ने भी अगले छत्तीस से बहत्तर घंटों में नई बातचीत शुरू होने के संकेत दिए हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।

 

पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल सप्लाई, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। आने वाले समय में बातचीत होती है या नहीं, यही तय करेगा कि हालात बेहतर होंगे या और बिगड़ेंगे।

ये भी पढ़ें: बंगाल और तमिलनाडु में मतदान जारी, बूथों पर सुबह से ही उमड़ी भीड़, चेन्नई में एक्टर अजित कुमार के पहुंचते ही मची हलचल