US Iran War Update: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान पर सैन्य हमले लगातार जारी रहें, जबकि ट्रम्प फिलहाल बातचीत और समझौते को मौका देना चाहते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा कि ईरान पर प्रस्तावित हमले रोकना गलत फैसला होगा और कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ को फिलहाल रोका गया
सीएनएन के अनुसार, ट्रम्प ने रविवार को नेतन्याहू को बताया था कि अमेरिका ईरान पर नए टारगेटेड हमले की तैयारी कर रहा है। इस अभियान को “ऑपरेशन स्लेजहैमर” नाम दिया गया था।
लेकिन करीब 24 घंटे बाद ट्रम्प ने घोषणा कर दी कि मंगलवार को होने वाले हमलों को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रम्प ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों की अपील के बाद यह फैसला लिया गया।
US Iran War Update: पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट
1. अमेरिकी संसद में जंग रोकने वाला प्रस्ताव पास
अमेरिकी सीनेट में ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हो गया। खास बात यह रही कि 4 रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रम्प के खिलाफ वोट दिया। अगर यह कानून बनता है तो ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए ट्रम्प को कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी।
2. ट्रम्प बोले- ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म
अमेरिकी कोस्टगार्ड एकेडमी में भाषण देते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब सवाल सिर्फ इतना है कि अमेरिका आगे पूरी कार्रवाई करेगा या ईरान समझौते का रास्ता चुनेगा।
3. होर्मुज स्ट्रेट से 26 जहाज गुजरे
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में 26 जहाज ईरान की मंजूरी के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल टैंकर और कई कॉमर्शियल जहाज शामिल थे।
4. नई पाइपलाइन बना रहा संयुक्त अरब अमीरात
संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाली नई तेल पाइपलाइन का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। युद्ध के बाद फुजैराह तेल हब के आसपास ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।
5. संयुक्त राष्ट्र ने खाद्य संकट की चेतावनी दी
संयुक्त राष्ट्र की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट बढ़ी तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। एजेंसी ने देशों से वैकल्पिक सप्लाई रूट तैयार करने की अपील की है।
ईरान ने लॉन्च किए नए रेस्क्यू वाहन
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी ने नए इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहनों और विशेष रेस्क्यू उपकरणों का बेड़ा लॉन्च किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इनका उद्देश्य आपदा राहत और मानवीय सहायता को मजबूत करना है।
इन उपकरणों का इस्तेमाल खोज एवं बचाव अभियान, मेडिकल सहायता और आपदा प्रबंधन में किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में राहत कार्य तेजी से हो सके।

दो लोगों को फांसी दी गई
ईरान ने दो लोगों को फांसी दे दी है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, दोनों पर देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और एक आतंकी संगठन से जुड़े होने का आरोप था।ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, उन पर सशस्त्र विद्रोह, आपराधिक गिरोह बनाने, गोलीबारी और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। हाल के महीनों में ईरान में सुरक्षा और जासूसी मामलों में गिरफ्तारियां और फांसी की घटनाएं बढ़ी हैं।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख ईरान जा सकते हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान दौरे पर जा सकते हैं। माना जा रहा है कि यह यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच जारी मध्यस्थता प्रयासों का हिस्सा है।बताया जा रहा है कि पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बैकचैनल बातचीत में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी तेहरान पहुंचे थे।
अमेरिका को भारी हवाई नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ चलाए गए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस ऑपरेशन में 42 एयरक्राफ्ट और ड्रोन या तो तबाह हुए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए।इनमें 6 फाइटर और अटैक जेट शामिल हैं। तबाह हुए जेट में 1 एफ-35, 4 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल और 1 ए-10 थंडरबोल्ट-2 शामिल है।
सबसे ज्यादा नुकसान ड्रोन कैटेगरी में हुआ। कुल 25 ड्रोन तबाह हुए, जिनमें 24 एमक्यू-9 रीपर और 1 एमक्यू-4सी ट्राइटन शामिल है। इसके अलावा 11 अन्य विमान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पहले ही बता चुका है कि इस युद्ध पर करीब 2.81 लाख करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

तख्तापलट की योजना का दावा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल का मकसद सिर्फ ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को कमजोर करना नहीं था, बल्कि वहां सत्ता परिवर्तन की योजना भी बनाई गई थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को नए नेता के तौर पर आगे लाने की तैयारी थी। बताया गया कि पहले दिन इजराइल ने तेहरान में अहमदीनेजाद के घर के पास हमला भी किया था, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
तीन चरणों में था तख्तापलट का प्लान
पहला चरण: ताबड़तोड़ हवाई हमले कर ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाना और कुर्द लड़ाकों को सक्रिय करना।
दूसरा चरण: देश में अराजकता और युद्ध जैसे हालात पैदा करना, ताकि लगे कि ईरानी सरकार नियंत्रण खो चुकी है।
तीसरा चरण: गैस और बिजली सप्लाई रोककर राजनीतिक दबाव बढ़ाना और फिर नई नेतृत्व व्यवस्था लागू करना।
श्रीलंका के चाय कारोबार पर असर
ईरान युद्ध का असर अब श्रीलंका के चाय उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और निर्यात में गिरावट के कारण कंपनियों और मजदूरों पर दबाव बढ़ गया है।श्रीलंका के एक्सपोर्ट डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक, मार्च में चाय निर्यात से होने वाली कमाई 17.3 प्रतिशत घटकर 11.47 करोड़ डॉलर रह गई।
इराक से मांग में 38 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि संयुक्त अरब अमीरात को चाय निर्यात 93 प्रतिशत तक कम हो गया। इसकी वजह शिपिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर पड़ा असर बताया जा रहा है।
अमेरिका की धमकियों के बीच ईरान ने कहा है कि उसके पास अब भी कई ऐसे आधुनिक हथियार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल अब तक युद्ध में नहीं किया गया है।रूसी न्यूज एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक, ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अगर दोबारा हमला हुआ तो इस बार जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा।
सीजफायर प्रस्ताव पर चर्चा जारी
ईरान ने कहा है कि वह अपने नए प्रस्ताव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया की समीक्षा कर रहा है। नूर न्यूज एजेंसी के अनुसार, दोनों देशों के बीच संभावित सीजफायर दस्तावेज को लेकर बातचीत जारी है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि 14 सूत्रीय प्रस्ताव को लेकर कई बार संदेशों का आदान-प्रदान हो चुका है और अमेरिकी प्रतिक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
फिर महंगा हुआ कच्चा तेल
ईरान युद्ध और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें फिर बढ़ गई हैं।ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है।
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता तो उसे ऐसी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जैसी आधुनिक इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई।रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश में जुटा है।
सऊदी अरब में गैस संकट
ईरान युद्ध और होर्मुज संकट के बीच सऊदी अरब में गैस सप्लाई घट गई है। इसके कारण बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल किया जा रहा है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण सऊदी अरब ने फ्यूल ऑयल आयात काफी बढ़ा दिया है। अप्रैल में देश ने करीब 17 लाख टन फ्यूल ऑयल आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में 86 प्रतिशत ज्यादा है।

अमेरिका में ईरान युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी कैपिटल के बाहर पूर्व सैनिकों और युद्ध विरोधी कार्यकर्ताओं ने ट्रम्प प्रशासन की सैन्य नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया।इस प्रदर्शन में डेमोक्रेट सांसद टैमी डकवर्थ और टिम केन भी शामिल हुए।

ट्रम्प बोले- जंग जरूरी थी
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास जंग के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था, क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।उन्होंने दावा किया कि अब ईरान समझौते के लिए तैयार दिखाई दे रहा है और अमेरिका का दबाव असर दिखा रहा है।ट्रम्प ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल से भरे करीब 1600 जहाज खड़े हैं, जो जल्द बाहर निकलना शुरू करेंगे।
ईरानी राष्ट्रपति से मिले पाकिस्तान के गृह मंत्री
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार को तेहरान में पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद मोहसिन नकवी से मुलाकात की।करीब 90 मिनट चली इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान-अमेरिका तनाव और दोनों देशों के संबंधों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में सीमा सुरक्षा और संभावित शांति प्रयासों पर भी बात हुई।
अमेरिकी विदेश विभाग की निगरानी यूनिट गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन की जांच कर रही है।फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए दिए गए 3 करोड़ डॉलर के फंड और उसके इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
संस्था पर आरोप है कि उसने राहत वितरण के दौरान संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों को दरकिनार किया। इसके अलावा राहत केंद्रों के आसपास हिंसा और गोलीबारी की घटनाओं के आरोप भी लगे हैं।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की अगस्त 2025 की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मई 2025 से शुरू हुए गाजा राहत अभियान के बाद राहत केंद्रों के आसपास कम से कम 859 फिलिस्तीनी मारे गए थे। इनमें राहत लेने पहुंचे आम नागरिक भी शामिल थे।
ट्रम्प बोले- नेतन्याहू वही करेंगे जो मैं चाहूंगा
ट्रम्प ने कहा कि इजराइल में उनकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है और जरूरत पड़ी तो वे वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं।उन्होंने कहा कि नेतन्याहू एक अच्छे नेता हैं और अगर जरूरत हुई तो वे वही करेंगे, जो ट्रम्प चाहेंगे।
वहीं संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी ने कहा है कि होर्मुज को बायपास करने वाली नई तेल पाइपलाइन का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने बताया कि यह पाइपलाइन तेल निर्यात को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने के लिए तैयार की जा रही है।








