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सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स ने मारी बाजी, ट्रंप को लगा बड़ा झटका

US Midterm Elections:

US Midterm Elections: यूएस मिडटर्म इलेक्शन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। यह प्रक्रिया 3 नवंबर को समाप्त हुई है और अब इस इलेक्शन के नतीजे सामने आ गए हैं। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से यह तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर किसका नियंत्रण होगा। जानकारी के अनुसार, यूएस मिडटर्म इलेक्शन 2026 (अमेरिकी मध्यावधि चुनाव) में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। खबर इंडिया के इस एक्सप्लेनर में जानिए कि किस वजह से ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को किस प्रकार बड़ा झटका लगा है।

US Midterm Elections: दोनों सदनों में रिपब्लिकन को मिली हार

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन सीनेट (Senate) और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) में 4 नवंबर 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार मिली है। सीनेट के आंकड़ों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स के पास 53 सीटें हैं, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास 41 सीटें हैं। डेमोक्रेट्स के 53 सीटों के आंकड़े में दो निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। इसके अलावा, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की बात करें तो यहां डेमोक्रेट्स ने 214 सीटें हासिल की हैं और रिपब्लिकन्स ने 126 सीटें हासिल की हैं। हालांकि, हाउस की कई सीटों पर मतगणना जारी है।

US Midterm Elections: सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के आंकड़े

अमेरिका के 3 नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में बढ़त हासिल की है। नीचे दोनों सदनों के आंकड़े चार्ट के रूप में दिए हैं।

1. अमेरिकी सीनेट (US Senate) – 100 सीटें

  • बहुमत का आंकड़ा: 51 सीटें।
  • डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी से 7 सीटें छीनी हैं।
  • कुछ सीटों पर अभी नतीजे बाकी हैं।

2. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स – 435 सीटें

  • बहुमत का आंकड़ा: 218 सीटें।
  • डेमोक्रेट्स ने 226 सीटें जीत ली हैं।
  • रिपब्लिकन पार्टी को 139 सीटें मिली हैं।
  • कुछ सीटों पर मतगणना जारी है।

दोनों सदनों का निष्कर्ष

सदन डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी
सीनेट 20 जीतीं 13 जीतीं
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स 226 जीतीं 139 जीतीं

ध्यान दें: सीनेट में 20 और 13 इस बार जीती गई सीटें हैं। दोनों पार्टियों की पहले से मौजूद सीटें (Holdovers) अलग हैं। इसलिए इन्हें कुल सीटों का आंकड़ा न समझें।

इन पांच कारणों से हारी रिपब्लिकन पार्टी


अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इन पांच कारणों की वजह से रिपब्लिकन पार्टी को हार मिली है। इतना ही नहीं, जानकारी के अनुसार, इन पांच कारणों में से एक प्रमुख कारण ऐसा भी है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद स्वीकार किया है और यह हार की सबसे बड़ी वजह है।

ईरान युद्ध और अमेरिकी जनता का आक्रोश

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह है “ईरान युद्ध”। इस बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्वीकार किया है। मिली जानकारी के अनुसार, ईरान युद्ध और सैन्य संघर्ष ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया। इसके अलावा, अमेरिकी जनता ने बाहर के देशों से युद्ध में उलझने और उन पर भारी बजट खर्च करने को लेकर आक्रोश जताया है। अमेरिकी जनता का कहना है कि वह ट्रंप के दूसरे देशों से युद्ध लड़ने और उन पर भारी बजट खर्च करने के पक्ष में नहीं थी।

महंगाई ने बिगाड़ा आम अमेरिकी परिवारों का बजट

अमेरिका में लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर गैस और बिजली के खर्च तक में बढ़ोतरी देखने को मिली। ऐसे में आम अमेरिकी परिवारों के लिए अपना बजट संभालना मुश्किल होता चला गया। चुनाव के दौरान लोगों ने रिपब्लिकन पार्टी की आर्थिक नीतियों और टैक्स व टैरिफ से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए। माना जा रहा है कि महंगाई और बढ़ते खर्च का असर मतदाताओं के फैसले पर भी पड़ा।

मतदाताओं के बीच कमजोर पड़ती गई ट्रंप की पकड़

मिडटर्म चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेत मिले थे। उनकी नीतियों और बयानों को लेकर मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली। खासकर स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाताओं का रुख पहले के मुकाबले बदला हुआ नजर आया। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी चुनाव के दौरान इसी नाराजगी को मुद्दा बनाया और मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की।

युवा और महिला मतदाताओं का रिपब्लिकन पार्टी से बदला रुख

रिपब्लिकन पार्टी को ग्रामीण इलाकों में अपने पारंपरिक समर्थकों का साथ मिला, लेकिन शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में पार्टी को चुनौती का सामना करना पड़ा। इन इलाकों के युवा और महिला मतदाताओं के बीच पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ने की बात सामने आई। सामाजिक मुद्दों, नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े विषयों ने भी चुनाव में अहम भूमिका निभाई। इन मुद्दों पर डेमोक्रेटिक पार्टी को मतदाताओं के एक वर्ग का समर्थन मिलता दिखाई दिया।

डेमोक्रेटिक समर्थकों ने मतदान में दिखाई एकजुटता

मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने समर्थकों को मतदान केंद्रों तक लाने पर खास जोर दिया। ट्रंप की नीतियों और फैसलों को लेकर नाराज मतदाताओं ने भी चुनाव में अपनी भागीदारी दिखाई। डेमोक्रेटिक समर्थकों ने कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से मतदान किया। इसी वजह से चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों की एकजुटता भी चर्चा का विषय बनी।

सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में क्या अंतर है?

अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन सीनेट (Senate) और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) हैं। इन्हें भारत की संसद के दो सदनों से भी समझा जा सकता है। सीनेट की तुलना भारत की राज्यसभा से की जाती है, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की तुलना लोकसभा से की जाती है। हालांकि, दोनों देशों की संसदीय व्यवस्था में कुछ अंतर भी हैं। अमेरिका की सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं, जिसमें सभी 50 राज्यों से दो-दो सदस्य चुने जाते हैं। इनका कार्यकाल छह साल का होता है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 मतदान करने वाले सदस्य होते हैं, जिन्हें राज्यों की आबादी के आधार पर चुना जाता है। इनका कार्यकाल दो साल का होता है। भारत की तरह अमेरिका में भी कानून बनाने के लिए दोनों सदनों की भूमिका अहम होती है।

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