US on PAK: अमेरिका औजारों की खेप पाकिस्तान को पहुंचाने में लगा है। पाकिस्तानी सेना को मजबूत करने के लिए 686 मीलियन डालर की सहायता कर रहा है। इसमें एफ-16 फाइटर विमानों को आधुनिक बनाने के लिए यह सहायता दे रहा है। कहने को तो टंप इसे पाकिस्तान में आतंकवाद को समाप्त करने की कोशिश मान रहा है। पर बात ऐसी नहीं है। पाकिस्तान को इस सहायता को देने का मतलब है, भारत को कमजोर करना।
भारत-पाकिस्तान के पिछले लड़ै जाने वाले युद्धों पर एक नजर दौड़ायें, तो अमेरिका का हमेशा भारत को नीचा दिखाने का प्रयास रहा है। 1965 के युद्ध में अमेरिका ने पेटेंट टैंक पाकिस्तान को सप्लाई किए थे, उसका भरपूर प्रयोग भारत के खिलाफ हुआ था। भारत ने भी उसका जवाब इस तरह से दिया कि उन ध्वस्त पेटेंट टैंको का अंबार भारत-पाक युद्ध के मैदान में दुनिया को दिखा। इसमें पाकिस्तान को भारत ने हराया, साथ ही अमेरिका के सैनिक औजारों पर प्रश्नचिन्ह लगा।
इसी तरह 1971 में पाकिस्तान ने भारत को युद्ध के लिए उकसाया, इसमें भी अमेरिका की पाकिस्तान को दी हुई सैनिक सहायता दुनिया के सामने आई। भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे; बांग्ला देश पाकिस्तान से टूटकर स्वतंत्र देश के रूप में दुनिया के नक्शे पर उभरा। दूसरी ओर पाकिस्तान के एक लाख सैनिकों को भारत ने बंदी बनाया था। ऐसा चमत्कार भारत ने दुनिया के सामने कर दिखाया।
एक और युद्ध पाकिस्तान ने भारत पर थोपा- वह था कारगिल का युद्ध ; इसमें भी पाकिस्तान की जबर्दस्त हार हुई। युद्धों का सिलसिला पाकिस्तान का भारत के साथ चल रहा है। यह लड़ाई कब खत्म होगी ? कह नहीं सकते, क्योंकि 1971 के युद्ध में बुरी हार होने के बाद भी पाकिस्तान का तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अलि भुट्टो ने हजार साल तक भारत के साथ लड़ने की बात कही थी। भारत पाक लड़ाई को सुलगाये रखने में अमेरिका का हाथ हथियारों की सप्लाई में रहा है। इसलिए पाकिस्तान को अमेरिका की सैनिक सहायता, आने वाली लड़ाई का ही संदेश है। भारत को इसके लिए सर्तक रहने की जरूरत है।
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