US Pacific Command: साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय अमेरिका का कहना था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशन) का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशन) की सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियां पहले की तुलना में अधिक जुड़ गई हैं।इसी वजह से कमांड के नाम में “इंडो” शब्द को शामिल किया गया था, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाया जा सके।
क्या है US पैसिफिक कमांड?
अमेरिकी सेना दुनिया को अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों में बांटकर काम करती है। इसके लिए कुल 11 कमांड बनाई गई हैं, जिनमें 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड शामिल हैं।US पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी सैन्य कमांडों में से एक मानी जाती है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है।
नाम बदलने की वजह क्या बताई गई?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, “US पैसिफिक कमांड” नाम ऐतिहासिक महत्व रखता है और काफी पुराना है। मंत्रालय का कहना है कि इस नाम को वापस लाने से सैनिकों को अपनी सैन्य विरासत और इतिहास पर गर्व महसूस होगा।पेंटागन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल कमांड का नाम बदला गया है। इसकी रणनीति, जिम्मेदारियों और संचालन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

US Pacific Command: विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस फैसले को अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनका मानना है कि कमांड के नाम से “इंडो” शब्द हटाने का संदेश यह हो सकता है कि अमेरिका अब हिंद महासागर क्षेत्र और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं देना चाहता।विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान चीन को अमेरिका के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती माना जाता था। उस समय अमेरिका यह दिखाना चाहता था कि भारत उसकी एशिया नीति का अहम हिस्सा है और चीन का मुकाबला करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ट्रम्प प्रशासन ने यह संदेश भी देने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए। इसी सोच के तहत “इंडो-पैसिफिक” अवधारणा को बढ़ावा मिला था।हालांकि अब कुछ जानकारों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है, जिसकी झलक इस नाम परिवर्तन में दिखाई दे रही है।
क्वाड को लेकर थरूर की चिंता
कमांड का नाम फिर से बदलने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिकी आदेश की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सवाल उठाया।थरूर ने लिखा, “क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है?”उनकी इस टिप्पणी के बाद क्वाड (Quad) और अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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