US Tariffs: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। देश के 25 राज्यों ने इस फैसले के खिलाफ अदालत का रुख किया है। इन राज्यों का कहना है कि भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामान पर 10% से 12.5% तक लगाया गया आयात शुल्क कानून के खिलाफ है।
राज्यों ने कोर्ट में दायर याचिका में मांग की है कि इन नए टैक्सों पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही सरकार ने अब तक जो रकम इन शुल्कों के रूप में वसूली है, उसे भी वापस लौटाया जाए।
भारत समेत कई देशों पर लगाया गया नया टैक्स
राज्यों के मुताबिक, पिछले महीने अमेरिका ने भारत सहित 59 अन्य देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाया था। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ये देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों को रोकने में प्रभावी कदम उठाने में असफल रहे हैं।इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अस्थायी टैक्स लागू किए थे। उनकी अवधि खत्म होने के बाद प्रशासन ने अब नए नियमों के तहत फिर से आयात शुल्क लागू कर दिया है।
राज्यों ने बताया फैसला अवैध
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को गैरकानूनी करार दिया है। उनका कहना है कि इन अतिरिक्त टैक्सों का सीधा असर अमेरिकी परिवारों और कारोबार पर पड़ेगा, क्योंकि आयातित सामान महंगे हो जाएंगे और व्यापार की लागत बढ़ेगी।राज्यों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए ऐसे टैक्स लगाए थे। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति को इस तरह से आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के फैसले के बाद सरकार को आयातकों से वसूली गई रकम वापस करनी पड़ी थी।
ट्रंप प्रशासन ने अपनाया नया कानूनी रास्ता
पुराने फैसले के बाद इस बार ट्रंप प्रशासन ने अलग कानूनी प्रावधान का सहारा लिया है। सरकार ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई करते हुए उन देशों पर 10% से 12.5% तक का आयात शुल्क लगाया है, जिन पर अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होने या जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप है।
व्हाइट हाउस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम पूरी तरह कानून के दायरे में है। प्रशासन का दावा है कि इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों, घरेलू उद्योगों और व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
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