Uttar Pradesh: लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां पलभर में छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में 27 वर्षीय नीलेश कुमार और 30 वर्षीय अनामिका सामंत की भी जान चली गई, जो जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले थे। जिन घरों में आने वाले दिनों में शादी की तैयारियां और खुशियों की गूंज सुनाई देने वाली थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। इस हादसे ने एक खूबसूरत प्रेम कहानी को हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।
दफ्तर की दोस्ती से शुरू हुआ था प्यार का सफर
नीलेश कुमार और अनामिका सामंत अलीगंज स्थित एक एनिमेशन और गेमिंग सेंटर में साथ काम करते थे। रोजाना की मुलाकातों ने पहले दोस्ती का रिश्ता बनाया और फिर यही दोस्ती धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई। दोनों ने अपने रिश्ते को एक नई पहचान देने का फैसला किया और शादी करने की इच्छा अपने परिवारों के सामने रखी।परिजनों के मुताबिक दोनों परिवार इस रिश्ते से बेहद खुश थे। कुछ ही दिन पहले अनामिका के माता-पिता पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे, जहां दोनों परिवारों की मुलाकात हुई और शादी को लेकर शुरुआती रस्में भी पूरी कर ली गई थीं। हर कोई इस नए रिश्ते को लेकर उत्साहित था और आने वाले सुनहरे दिनों के सपने देख रहा था।
Uttar Pradesh: शादी की तैयारियां शुरू, टिकट भी हो चुके थे बुक
नीलेश और अनामिका की शादी की तारीख तय करने के लिए अगले सप्ताह नीलेश का परिवार पश्चिम बंगाल जाने वाला था। इसके लिए ट्रेन के टिकट भी बुक हो चुके थे। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में जुटे थे और दोनों की नई जिंदगी की शुरुआत का इंतजार कर रहे थे।नीलेश अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे और सभी के बेहद करीब थे। घर में उनकी शादी को लेकर उत्साह का माहौल था, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
Uttar Pradesh: नए घर में दुल्हन लाने का सपना रह गया अधूरा
नीलेश अपने करियर के साथ-साथ परिवार के सपनों को पूरा करने में भी जुटे हुए थे। उनके रिश्तेदारों के अनुसार, वह अक्सर कहते थे कि इस साल प्रमोशन और वेतन वृद्धि के बाद वह आर्थिक रूप से और मजबूत हो जाएंगे। उनका सपना था कि नए बन रहे घर में शिफ्ट होने के बाद ही वह धूमधाम से शादी करेंगे और अनामिका को दुल्हन बनाकर उस घर में लेकर आएंगे।इसी वजह से दोनों ने अपनी शादी अगले साल तक टालने का फैसला किया था। लेकिन जिस घर में बहू के स्वागत की तैयारियां होनी थीं, वहां आज बेटे के बिछड़ने का गम छाया हुआ है।
अनामिका के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
यह हादसा अनामिका के परिवार के लिए और भी ज्यादा दर्दनाक साबित हुआ। आग की इस भयावह घटना में अनामिका के साथ उनकी 27 वर्षीय चचेरी बहन सोमिल्या की भी दम घुटने से मौत हो गई। दोनों एक ही दफ्तर में काम करती थीं और भविष्य को लेकर कई सपने संजोए हुए थीं।कुछ घंटे पहले तक जिन परिवारों में शादी की तैयारियों, गहनों, कपड़ों और निमंत्रण पत्रों को लेकर चर्चाएं हो रही थीं, वहीं शाम होते-होते मातम का माहौल छा गया। परिवारों के वे सपने, जिन्हें वर्षों तक संजोया गया था, एक ही हादसे में राख हो गए।
खामोश हो गई एक प्रेम कहानी
नीलेश और अनामिका की कहानी सिर्फ दो लोगों के प्यार की कहानी नहीं थी, बल्कि दो परिवारों की उम्मीदों, सपनों और खुशियों से जुड़ी एक ऐसी दास्तान थी, जो अब हमेशा के लिए अधूरी रह गई। लखनऊ अग्निकांड ने न सिर्फ दो जिंदगियां छीनी हैं, बल्कि उन तमाम सपनों को भी खत्म कर दिया है, जिनके साथ दोनों एक नए जीवन की शुरुआत करने वाले थे। आज उनकी यादें ही दोनों परिवारों के पास सबसे बड़ी धरोहर बनकर रह गई हैं।







