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मुर्शिदाबाद में ममता बनर्जी को बड़ा झटका, 9 में से 8 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ

West bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के भीतर जारी सियासी घमासान इस स्तर तक पहुंच गया है कि TMC दो खेमों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को 58 विधायकों का समर्थन मिल गया है, जिसके बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक, विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े हो गए हैं। वहीं ममता बनर्जी के साथ करीब 20 विधायक बताए जा रहे हैं। दो अन्य विधायक अभी खुलकर किसी पक्ष में नहीं आए हैं।

मुर्शिदाबाद में ममता को सबसे बड़ा झटका

TMC में मचे इस सियासी भूचाल का सबसे ज्यादा असर मुर्शिदाबाद जिले में देखने को मिला है। जिले के 9 विधायकों में से 8 ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

West bengal: बाबर अली ने ममता का साथ नहीं छोड़ा

हालांकि जलांगी सीट से विधायक बाबर अली ने ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी निष्ठा ममता बनर्जी के साथ है और वह आगे भी उनके नेतृत्व में ही काम करेंगे।

West bengal: निष्कासन के बाद बढ़ा विद्रोह

पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने TMC के भीतर खुला मोर्चा खोल दिया। उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए खुद को विधायक दल का नेता घोषित किया। इसके बाद बुधवार को उन्हें आधिकारिक तौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिल गई।

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को भी चुनौती

West bengal: नई राजनीतिक स्थिति में ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनके नेतृत्व वाले गुट ने जावेद अहमद खान, सबीना यास्मीन, संदीपन साहा और सिउली साहा को डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी सौंपी है। अब सवाल यह है कि क्या TMC इस बड़े राजनीतिक संकट से उबर पाएगी या फिर बंगाल की राजनीति में एक नए दल और नए समीकरणों की शुरुआत होने वाली है।

 

 

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