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महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में घमासान, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

Yogi Adityanath

Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा सियासी टकराव का केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लाए गए निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। कई मौकों पर माहौल इतना गरमा गया कि कार्यवाही बाधित करनी पड़ी और कुछ विवादित बयानों को रिकॉर्ड से हटाना पड़ा।

निंदा प्रस्ताव पर बढ़ा राजनीतिक टकराव

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सरकार द्वारा लाए गए निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा। सरकार का आरोप था कि विपक्ष ने पहले भी महिला आरक्षण में बाधाएं डाली हैं, जबकि विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि विधेयक पारित होने के बावजूद इसे लागू करने में देरी की जा रही है। इस मुद्दे ने पूरे सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया।

Yogi Adityanath: विधायकों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप

सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान और मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इसी बीच मंत्री आशीष पटेल ने कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा को भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिस पर उन्होंने तीखा जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान राजनीति की बुनियाद कांग्रेस ने ही रखी है।

महिला मुद्दों पर सियासत के आरोप

सपा विधायक रागिनी सोनकर ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कविता के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि महिलाओं को केवल नारे तक सीमित किया जा रहा है। वहीं सपा विधायक पल्लवी पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन और जनगणना जैसी शर्तें जोड़कर महिला आरक्षण को टालने की कोशिश कर रही है।

Yogi Adityanath: सरकार का पक्ष और प्रतिनिधित्व की दलील

सरकार की ओर से मंत्री असीम अरुण ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लंबा इंतजार उचित नहीं है और अन्य देशों के उदाहरण देते हुए उन्होंने अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री संजय निषाद और विजय लक्ष्मी गौतम ने भी विपक्ष की आलोचना करते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। पूरे सत्र के दौरान लगातार हंगामे और तीखी बहस के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में बना रहा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह साफ है कि यह विषय आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाता रहेगा।

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