Opinion: सनातन धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा वैदिक-पौराणिक काल से हो रही है। ब्रह्मांड के संचालन, संतुलन और व्यवस्था को बनाए रखने वाले ये त्रिदेव किसी से भी अपेक्षा नहीं रखते कि वह आकर इनकी पूजा करे, सदियों से लोग स्वयं ही अतृप्त आत्माओं की तरह इनकी तरफ खिंचे चले आ रहे हैं। लोग बड़ी आस्था के साथ इन देवताओं की पूजा के लिए उत्सुक रहते हैं।ऐेसे में यदि किसी राजनीतिक पार्टी का कोई प्रवक्ता बड़ी शान से यह शपथ लेता है कि वह ब्रह्मा, विष्णु और महेश को नहीं मानता है और उनकी पूजा नहीं करेगा, तो इसमें इन त्रिदेवों का भला क्या नुकसान हो जाएगा? इन त्रिदेवों के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था उस पौराणिक काल में नहीं टूटी जब दैत्य या राक्षस हवन-यज्ञ करने वाले ऋषि-मुनियों की गर्दन काट देते थे।राक्षस यज्ञ की वेदियों और हवन-कुंडों में मांस, रक्त और मृत जीवों की हड्डियां फेंककर पवित्र अनुष्ठानों को दूषित कर देते थे।त्रिदेव के प्रति तब लोगों की आस्था और मजबूत हुई जब विदेशी आक्रांताओं ने आकर इनके मंदिरों में जमकर लूटपाट की एवं रक्तपात मचाया।
अपनी पार्टी की छीछालेदर करवा गए प्रवक्ता
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा न करने संबंधी जो शपथ ली, उस पर बेशक वे गर्व कर सकते हैं, लेकिन सच यही है कि जनता की नजरों में वे खुद की और अपनी पार्टी की छीछालेदर करवा चुके हैं।सोशल मीडिया पर लोग उन्हें गालियां तक दे रहे हैं। वे जिस गूर्जर विरादरी से आते हैं, उसके लोग भी उनसे नाखुश हैं, उन्हें भला-बुरा कह रहे हैं। उनकी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव तक को ताने दे रहे हैं कि आप कैसे यदुवंशी हो कि आपकी पार्टी के प्रवक्ता कृष्ण का तिरस्कार कर रहे हैं। क्या प्रवक्ता को पता नहीं रहा होगा कि वे जो शपथ ले रहे हैं, उसकी समाज में क्या प्रतिक्रिया होगी? आखिर वे पढ़े-लिखे हैं और एक बड़ी पार्टी के प्रवक्ता भी हैं, लिहाजा ऐसा लगता है कि उन्होंने जो कुछ भी किया सोच-समझकर किया और अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल किया।
Opinion: इसमें सनातन धर्म का क्या कसूर?
दरअसल, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश को न मानने वाले राजकुमार भाटी जिस पार्टी से ताल्लुक रखते हैं, वह पार्टी एक समुदाय विशेष को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश करती रही है।इसके नेता विवादास्पद बयानबाजी करते रहे हैं। शायद इस बार भी पार्टी प्रवक्ता ने शपथ के जरिये समुदाय विशेष को खुश करने की कोशिश की है। इस बीच प्रवक्ता के अलावा पार्टी के एक अन्य नेता जो कि एमएलसी चुनाव में हैं, उनका बयान भी सनातन संस्कृति के खिलाफ और समुदाय विशेष को खुश करने वाला ही प्रतीत होता है।एमएलसी उम्मीदवार ने पीड़ा व्यक्त की है कि चुनाव के दौरान उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की गई।उनसे जुड़े स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि “मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। मैं ऐसे सनातन में नहीं रहना चाहता हूँ। अगले महीने लखनऊ की शाही ईदगाह जाकर इस्लाम कबूल कर लूँगा।” समझ में नहीं आता है कि यदि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, तो इसमें सनातन धर्म की क्या भूमिका है। यदि कोई उन्हें या उनके समर्थकों को प्रताड़ित कर रहा है, तो सीधे-सीधे उसे कटघरे में खड़ा करें, इसमें सनतान धर्म का क्या कसूर? साफ है कि यूपी चुनाव में समुदाय विशेष के वोटों को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए सनातन विरोधी बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो चुका है। आखिर ये कैसी राजनीति है?








