Carbide Gun: दिवाली पर पटाखों और रोशनी के बीच कार्बाइड गन बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। मध्यप्रदेश में पिछले साल इस देसी विस्फोटक उपकरण से हुए हादसों में ऋतिक, सत्येंद्र और कार्तिक की आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा। किसी की एक आंख की रोशनी चली गई, तो किसी की पढ़ाई छूट गई। परिवारों ने इलाज के लिए कर्ज लिया, लेकिन इसके बावजूद बच्चों की हालत में पूरी तरह सुधार नहीं हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्बाइड गन की बिक्री रोकने और अवैध पटाखों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन बिक्री के दावे सामने आए हैं। आखिर कार्बाइड गन कैसे काम करती है, यह इतनी खतरनाक क्यों है और रोक के बावजूद इसकी बिक्री कैसे हो रही है? आइए, समझते हैं पूरा मामला।
कार्बाइड गन क्या है और यह इतनी खतरनाक क्यों है?
कार्बाइड गन एक देसी उपकरण है, जिसका इस्तेमाल कुछ लोग तेज आवाज निकालने के लिए करते हैं। इसमें कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्वलनशील गैस बन सकती है। इस गैस में आग लगने से दबाव तेजी से बढ़ता है और विस्फोट हो सकता है।
इस दौरान उपकरण के टुकड़े, प्लास्टिक या अन्य सामग्री तेज गति से बाहर निकल सकती है। पास खड़े व्यक्ति की आंख, चेहरा, हाथ और कान गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। आंख पर चोट लगने से स्थायी रूप से दृष्टि भी जा सकती है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसे चलाने वाला व्यक्ति भी विस्फोट की चपेट में आ सकता है। उपकरण में गैस का दबाव अनियंत्रित होने पर हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
Carbide Gun: कार्बाइड गन से तीन बच्चों की जिंदगी कैसे बदली?
पिछले साल दिवाली पर हुए हादसों ने तीन परिवारों की जिंदगी बदल दी। इन बच्चों के अनुभव बताते हैं कि कुछ सेकंड का धमाका किस तरह लंबे समय तक चलने वाली परेशानी में बदल सकता है।
ऋतिक: एक आंख की रोशनी गई, परिवार पर कर्ज
शमशाबाद के धोबीखेड़ा गांव के ऋतिक अहिरवार की एक आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई है। दूसरी आंख से भी उन्हें कम दिखाई देता है। उनके पिता जसवंत सिंह के मुताबिक, दिवाली के दौरान एक बच्चा कार्बाइड गन चला रहा था। इसी दौरान विस्फोट की चपेट में आने से ऋतिक की आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। परिवार उन्हें इलाज के लिए भोपाल एम्स समेत दूसरे अस्पतालों में ले गया। अब डॉक्टरों ने चेन्नई में इलाज कराने की सलाह दी है। परिवार के मुताबिक, इलाज पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और आगे भी लाखों रुपये की जरूरत पड़ सकती है। मजदूरी करने वाले जसवंत सिंह पर पहले से करीब एक लाख रुपये का कर्ज है। ऐसे में बेटे के आगे के इलाज का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सत्येंद्र: आंख को नुकसान, पढ़ाई भी छूटी
भिंड जिले की गोहद तहसील के कमलापुर गांव के 17 वर्षीय सत्येंद्र सिंह गुर्जर भी पिछले साल दिवाली पर कार्बाइड गन से घायल हुए थे। परिजनों के मुताबिक, सत्येंद्र ने घर में पानी की बोतल से कार्बाइड गन बनाई थी। उसे चलाने के दौरान धमाका हुआ और सामग्री के कण उनकी आंख में जा लगे। उन्हें पहले ग्वालियर के निजी अस्पताल और फिर भोपाल एम्स ले जाया गया। कई महीने इलाज चलने के बावजूद उनकी एक आंख की दृष्टि गंभीर रूप से प्रभावित हुई। चोट और लंबे इलाज के कारण उनकी पढ़ाई भी छूट गई। अब सत्येंद्र दूसरे बच्चों को ऐसे उपकरणों से दूर रहने की सलाह देते हैं।

कार्तिक: इंटरनेट पर वीडियो देखकर बनाया उपकरण
कार्तिक के पिता मुकेश कुशवाह के मुताबिक, उनके बेटे ने यूट्यूब पर कार्बाइड गन बनाने के वीडियो देखे थे। इसके बाद उसने बाजार से कार्बाइड लेकर एक देसी उपकरण बनाया। एक दिन उपकरण से धुआं नहीं निकला, तो कार्तिक झुककर उसे देखने लगा। इसी दौरान धमाका हो गया और उसकी आंख में गंभीर चोट आई। परिवार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा। बाद में भोपाल एम्स में भी इलाज कराया गया। डॉक्टरों ने चेन्नई में आगे के इलाज की सलाह दी है।मजदूरी करके परिवार चलाने वाले मुकेश के लिए इलाज का खर्च जुटाना मुश्किल है। भोपाल आने-जाने का खर्च उठाना भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है। इन तीनों मामलों में एक बात समान है: हादसा कुछ ही पलों में हुआ, लेकिन उसका असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आर्थिक स्थिति और भविष्य पर पड़ रहा है।
कार्बाइड गन पर रोक के बावजूद ऑनलाइन बिक्री कैसे हो रही है?
कार्बाइड गन के खतरे सामने आने के बाद इसकी बिक्री रोकने और ऐसे उपकरणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अधिकारियों को कार्बाइड गन और अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसे उपकरणों की बिक्री से जुड़े दावे सामने आए हैं। एक ई-कॉमर्स साइट पर कार्बाइड पाइप गन को ‘PVC Monkey Repeller Gun’ यानी बंदर भगाने वाले उपकरण के नाम से सूचीबद्ध पाया गया। रिपोर्ट में इसकी कीमत करीब ढाई हजार रुपये तक बताई गई और डिलीवरी के लिए पांच से सात दिन का समय दिए जाने का उल्लेख किया गया। यह मामला ऑनलाइन बिक्री पर निगरानी और नियमों के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, किसी वेबसाइट पर उत्पाद की सूची दिखाई देना और उसका वास्तविक रूप से खरीदार तक पहुंचना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए ऑनलाइन बिक्री की मौजूदा स्थिति और संबंधित प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की पुष्टि जरूरी है।
Carbide Gun: क्या कार्बाइड गन की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध है?
कार्बाइड गन की बिक्री और इस्तेमाल पर कार्रवाई का आधार संबंधित सरकारी आदेशों, लागू कानूनों और उपकरण की प्रकृति पर निर्भर करता है। दी गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कार्बाइड गन को आर्म्स एक्ट की श्रेणी में शामिल किया गया है। लेकिन इस दावे को प्रकाशित करने से पहले संबंधित सरकारी अधिसूचना या पुलिस-प्रशासन के आधिकारिक आदेश से सत्यापित करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्बाइड गन और अवैध पटाखों की बिक्री रोकने, विस्फोटक सामग्री के अवैध भंडारण पर कार्रवाई करने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब सवाल यह है कि इन निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर किस तरह हो रहा है। बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निगरानी, संदिग्ध उत्पादों की पहचान और शिकायतों पर कार्रवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
सरकार और प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कई निर्देश दिए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: कार्बाइड गन और अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के प्रयास। विस्फोटक सामग्री के अवैध भंडारण पर कार्रवाई। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाना। सार्वजनिक स्थानों पर गश्त और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना। इन कदमों का उद्देश्य दिवाली के दौरान हादसों को रोकना और अवैध रूप से खतरनाक उपकरण बेचने वालों पर कार्रवाई करना है। हालांकि, किसी प्रतिबंध का वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब बाजार और ऑनलाइन बिक्री दोनों पर प्रभावी निगरानी हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
Carbide Gun: आंख में चोट लगने पर क्या करें?
कार्बाइड गन या किसी विस्फोटक उपकरण से आंख में चोट लगने पर लापरवाही खतरनाक हो सकती है। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। इन बातों का ध्यान रखें: आंख को रगड़ें नहीं और उस पर दबाव न डालें। आंख में फंसे किसी कण को खुद निकालने की कोशिश न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा या आई ड्रॉप न डालें। आंख में चोट लगने पर तुरंत अस्पताल या नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं। चेहरे पर गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, बेहोशी या सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल आपातकालीन सहायता लें। विस्फोट से जलने पर प्रभावित जगह को साफ, ठंडे बहते पानी से ठंडा करें। आंख या चेहरे पर चोट होने की स्थिति में घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। अभिभावकों को बच्चों को ऐसे उपकरणों से दूर रखना चाहिए और इंटरनेट पर दिखाए जाने वाले खतरनाक प्रयोगों को दोहराने से रोकना चाहिए।
कुछ सेकंड का धमाका, जिंदगीभर का नुकसान
कार्बाइड गन को दिवाली पर मनोरंजन या तेज आवाज निकालने का साधन समझना गंभीर भूल हो सकती है। ऋतिक, सत्येंद्र और कार्तिक के मामले बताते हैं कि इससे आंखों को ऐसा नुकसान पहुंच सकता है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होती।
एक तरफ सरकार ने ऐसे उपकरणों की बिक्री रोकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, तो दूसरी तरफ ऑनलाइन उपलब्धता से जुड़े दावे निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन प्रतिबंधों के पालन की जांच करे, ऑनलाइन बिक्री की शिकायतों पर कार्रवाई करे और लोगों को इसके खतरों के बारे में जागरूक बनाए। दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है। किसी खतरनाक उपकरण से निकली एक चिंगारी किसी बच्चे की आंखों की रोशनी और पूरे परिवार की खुशियां छीन सकती है।








