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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव: ट्रंप की लोकप्रियता बनेगी ताकत या रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुसीबत?

मिडटर्म चुनाव में MAGA का कितना चलेगा असर?
मिडटर्म चुनाव में MAGA का कितना चलेगा असर?

US Midterm Elections: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपनी चुनावी रैलियों में देश की नीतियों और विकास से जुड़े मुद्दों पर बात करने के बजाय लोगों के शरीर, उनकी बनावट और अजीबोगरीब मजाक को लेकर ज्यादा चर्चा कर रहे हैं।ट्रंप के इस रवैये ने रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। उन्हें डर है कि क्या ट्रंप का यह अंदाज आगामी मध्यावधि चुनावों में पार्टी को जीत दिला पाएगा या फिर इसका नुकसान उठाना पड़ेगा?

US Midterm Elections: रैलियों से परेशान नजर आ रहे हैं ट्रंप

लगातार चुनावी रैलियों और व्यस्त कार्यक्रमों के कारण ट्रंप अब थके हुए दिखाई दे रहे हैं। फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान उन्होंने अपनी ही चुनावी सभाओं को ‘कचरा’ बता दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार 28 दिनों तक रैलियां करनी पड़ रही हैं। साथ ही, उन्होंने अपनी आवाज की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अब उनकी आवाज केवल 49 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रही है।किसी राष्ट्रपति का अपनी ही रैलियों और वहां मौजूद समर्थकों की भीड़ को लेकर इस तरह की शिकायत करना काफी हैरान करने वाला है।

ट्रंप बोले- मैं कुछ भी कहूं, आप तालियां बजाएंगे

ट्रंप का एक बयान इससे पहले भी काफी चर्चा में रहा था। पिछले महीने एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह चाहे कितनी भी बेवकूफी भरी बात क्यों न कह दें, उनके समर्थक फिर भी हंसेंगे और तालियां बजाएंगे।गौरतलब है कि अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले ट्रंप की इस तरह की बयानबाजी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बन रही है। हालांकि, पार्टी के नेता यह भी जानते हैं कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उन्हें ट्रंप के प्रभाव और लोकप्रियता की जरूरत है।

US Midterm Elections: क्या MAGA समर्थकों को अपने नेता की बातों का एहसास है?

ट्रंप के लगातार विवादित बयानों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके समर्थकों को लेकर उठ रहा है। क्या उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी ‘MAGA’ अभियान से जुड़े लोग कभी यह समझेंगे कि जिस नेता का वे लगातार समर्थन कर रहे हैं, वही उनकी भीड़ को ‘कचरा’ कह रहा है?

US Midterm Elections: अमेरिका चुनाव, ट्रंप का जादू या पार्टी को नुकसान?
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‘जिम जोन्स कल्ट’ से क्यों की गई ट्रंप के आंदोलन की तुलना?

ट्रंप की रैलियों और उनके समर्थकों के व्यवहार को समझने के लिए एक घटना पर गौर करना जरूरी है। कुछ समय पहले दक्षिण कैरोलिना में आयोजित एक रैली के दौरान फॉक्स न्यूज के एक रिपोर्टर ने वहां मौजूद समर्थक से पूछा कि वह इस कार्यक्रम में क्यों आया है।इस सवाल के जवाब में उस व्यक्ति ने 1978 में हुई गुयाना की एक भयावह घटना का जिक्र किया। इस घटना में धार्मिक नेता जिम जोन्स के प्रभाव में आकर 900 से ज्यादा लोगों ने सामूहिक रूप से अपनी जान दे दी थी। इसे ‘जिम जोन्स कल्ट’ और गुयाना नरसंहार के नाम से जाना जाता है।ट्रंप की रैली में पहुंचे उस समर्थक ने अपने अनुभव की तुलना इसी कल्ट को करीब से देखने से की। उसका यह जवाब सुनकर लोग हैरान रह गए।

US Midterm Elections: समर्थक के बयान ने क्यों शुरू की नई बहस?

इस बयान के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप का राजनीतिक आंदोलन अब केवल एक राजनीतिक गठबंधन तक सीमित रह गया है? या फिर यह ऐसे समर्थकों का समूह बन चुका है, जो अपने नेता के समर्थन में किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं?इस बहस का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या ट्रंप के कुछ समर्थक हिंसा जैसी बातों पर भी बिना सोचे-समझे तालियां बजा सकते हैं?

नीतियों से ज्यादा पहचान और नाराजगी से जुड़ा है समर्थकों का रिश्ता

ट्रंप और उनके समर्थकों के बीच का संबंध केवल नीतियों या विचारधारा पर आधारित नहीं दिखाई देता। इसके पीछे लोगों की व्यक्तिगत पहचान, नाराजगी और बदले की भावना भी बड़ी भूमिका निभाती है।ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि उन पर भ्रष्टाचार के कितने भी आरोप क्यों न लगें, वह उनके हितों के लिए लड़ने वाले नेता हैं। यही सोच उनके प्रति समर्थन को मजबूत बनाए रखती है।इसका असर अमेरिकी परिवारों में भी दिखाई दे रहा है। कई परिवारों में माता-पिता ट्रंप के कट्टर समर्थक हैं, जबकि उनकी युवा पीढ़ी उनके बयानों और राजनीतिक रवैये का विरोध करती है।ट्रंप अपने भाषणों में पारिवारिक मतभेदों को भी मजाक के तौर पर पेश करते हैं। इस तरह MAGA अब कई लोगों के लिए सिर्फ राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि उनकी पहचान का हिस्सा बन चुका है। इसका प्रभाव इतना गहरा है कि परिवारों के आपसी रिश्तों और थैंक्सगिविंग जैसे त्योहारों पर होने वाली बातचीत में भी राजनीतिक मतभेद सामने आने लगे हैं।

US Midterm Elections: रिपब्लिकन नेताओं के लिए बढ़ती मुश्किलें

इस पूरे राजनीतिक माहौल का एक और पहलू सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। उदारवादी विचारधारा वाले पॉडकास्टर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए ट्रंप समर्थकों के इंटरव्यू लेना लोकप्रिय कंटेंट बन गया है।वे समर्थकों से सीधे सवाल पूछते हैं और उनके जवाबों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इन वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि कई MAGA समर्थक बिना किसी तर्क के केवल अपने नेता का समर्थन करते हैं।हाल ही में ओहियो के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी भी इसी तरह की स्थिति में फंस गए। एक व्यक्ति ने उनके विज्ञापन में एक बाल यौन अपराधी (पेडोफाइल) के शामिल होने को लेकर सवाल उठाया। इस सवाल का जवाब देने के बजाय रामास्वामी को वहां से जाना पड़ा।इस घटना से यह भी पता चलता है कि विरोधी दल अब ऐसे वायरल वीडियो और घटनाओं का इस्तेमाल रिपब्लिकन नेताओं को घेरने के लिए कर रहे हैं।

ट्रंप की रैलियों में राजनीति से लेकर अजीबोगरीब मजाक तक

चुनाव नजदीक आने के साथ ट्रंप की रैलियों का स्वरूप भी बदलता दिखाई दे रहा है। उनकी चुनावी सभाओं में राजनीतिक मुद्दों के साथ स्टैंड-अप कॉमेडी, निजी शिकायतें और शरीर की बनावट से जुड़ी अजीबोगरीब बातें भी सुनने को मिल रही हैं।इस अनिश्चित अंदाज ने रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप का यह तरीका मतदाताओं को आकर्षित करके पार्टी को जीत दिला पाएगा या उनकी बयानबाजी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएगी?आखिरकार, मध्यावधि चुनाव में ट्रंप का प्रभाव रिपब्लिकन पार्टी के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित होगा या सबसे बड़ी चुनौती, इसका फैसला चुनाव के नतीजे करेंगे।