Delhi SIR Protest: दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को SIR के विरोध में INDIA ब्लॉक की बड़ी रैली हो रही है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, RJD समेत 20 से ज्यादा विपक्षी दलों के शामिल होने की बात कही गई है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे बड़े नेता इस मंच से अपनी बात रखेंगे। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। वहीं, इस रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों ने कारोबार और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई है। आखिर SIR क्या है, विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है और इस मुद्दे पर पूरा INDIA ब्लॉक एकजुट क्यों हुआ है? समझिए इस एक्सप्लेनर में।
SIR क्या है, जिसको लेकर विपक्ष कर रहा है विरोध?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों का सत्यापन किया जाता है। इसका उद्देश्य योग्य मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके लोगों के नाम हटाना है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखना है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं। इसी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
Delhi SIR Protest: विपक्ष SIR का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसके कारण लाखों मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी दल इसे ‘वोट चोरी’ से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी रामलीला मैदान में प्रदर्शन को लेकर कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ उनकी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि हर मतदाता के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
विपक्ष की मुख्य मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटाया जाए। साथ ही, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बीच अंतर समझना जरूरी है।
रामलीला मैदान की रैली में कौन-कौन से नेता होंगे शामिल?
SIR के खिलाफ INDIA ब्लॉक की इस रैली में 20 से ज्यादा विपक्षी दलों के शामिल होने की बात कही गई है। कांग्रेस ने इसमें 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया है। रैली को राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं के संबोधित करने की जानकारी दी गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने इसे लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई बताया है। वहीं, राहुल गांधी ने लोगों से रैली में शामिल होने की अपील करते हुए कहा था कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रदर्शन है। पिछले 25 दिनों में विपक्षी दल इस मुद्दे पर सातवीं बार एकजुट हुए हैं। इससे पहले अक्टूबर में भी अलग-अलग मौकों पर SIR के विरोध में प्रदर्शन किए गए थे।
Delhi SIR Protest: विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में भी क्यों उठाया SIR का मुद्दा?
SIR को लेकर विपक्ष की लड़ाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, RJD और वाम दलों के नेताओं ने दिल्ली में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके बाद 12 विपक्षी दलों के 13 नेताओं ने SIR के खिलाफ याचिका दायर की। 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और याचिका को SIR से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे।सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाब पर अपनी बात रखने के लिए 10 दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की गई है।

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों मांग रहा है?
SIR को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में निष्पक्षता और पारदर्शिता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसी विरोध के तहत विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना और प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान के अधिकार की रक्षा करना है। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया बताया गया है। ऐसे में इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने के लिए क्या पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
Delhi SIR Protest: रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारी क्यों चिंतित हैं?
SIR के खिलाफ विपक्ष की रैली के बीच दिल्ली के व्यापारियों ने भी अपनी चिंता जाहिर की है। कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को चौथी बार पत्र लिखकर रैली के कारण कारोबार और परिवहन प्रभावित होने की आशंका जताई है।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली के चलते करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रह सकती हैं। रामलीला मैदान के आसपास लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। संगठन ने इससे 10 से 12 हजार करोड़ रुपये तक के कारोबार प्रभावित होने का अनुमान जताया है। व्यापारी संगठनों ने रैली को 10 नवंबर तक टालने की मांग भी की थी। उनका तर्क है कि दिवाली और दूसरे त्योहारों के दौरान बाजारों में कारोबार अधिक रहता है। ऐसे में सड़कों पर भीड़, बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों से व्यापारियों को नुकसान हो सकता है। दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर रैली में आने वाले लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करने की अपील की थी। उनका कहना था कि प्रदर्शन के साथ खरीदारी करने से व्यापारियों को भी फायदा होगा।
दिल्ली में रैली के लिए सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?
रामलीला मैदान में रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सेंट्रल दिल्ली के DCP रोहित राजबीर के मुताबिक, पूरे इलाके में करीब 200 से 250 CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। रामलीला मैदान में अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेडिंग की गई है और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस की मदद के लिए सेवा दल, सिविल डिफेंस और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य भी मौजूद हैं। दिल्ली पुलिस ने रैली के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की अनुमति दी है। इसके बाद आयोजकों और कार्यकर्ताओं को मैदान खाली करना होगा। कार्यक्रम के बाद रातभर रुकने की अनुमति नहीं है।
Delhi SIR Protest: SIR का मुद्दा विपक्ष के लिए इतना अहम क्यों हो गया है?
SIR का मुद्दा विपक्ष के लिए केवल मतदाता सूची में बदलाव तक सीमित नहीं है। विपक्ष इसे लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता और मतदान के अधिकार से जोड़कर उठा रहा है। कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, RJD और दूसरे विपक्षी दलों का एक मंच पर आना यह दिखाता है कि वे इस मुद्दे पर साझा राजनीतिक रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी इसे संविधान और लोकतंत्र की लड़ाई बता रहे हैं, जबकि दूसरे विपक्षी नेता भी चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इसका राजनीतिक महत्व आने वाले चुनावों के लिहाज से भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे। ऐसे में विपक्ष SIR को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।
SIR पर सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर पहुंच चुका है। रामलीला मैदान की रैली के जरिए INDIA ब्लॉक अपनी एकजुटता दिखाना चाहता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई से भी इस विवाद की दिशा तय होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। साथ ही, विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष पर न्यायिक प्रक्रिया में क्या सामने आता है, इस पर भी नजर रहेगी।
Delhi: Visuals from inside Ramlila Maidan ahead of the INDIA bloc rally https://t.co/I0x5mJtAXt
— IANS (@ians_india) November 1, 2026
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