Israel Election: इसराइल में आम चुनाव के बाद एक बार फिर राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। अब तक 85 फीसदी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट में से कोई भी बहुमत हासिल करता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच, इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे सरकार बनाने के लिए हर संभव कोशिश करें, ताकि देश को एक और चुनाव का सामना न करना पड़े।
Israel Election: नेतन्याहू और आइज़नकोट को बहुमत मिलने के आसार नहीं
इसराइल के आम चुनाव में अब तक 85 फीसदी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। शुरुआती रुझानों के मुताबिक, न तो प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और न ही उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट बहुमत के आंकड़े तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में देश में नई गठबंधन सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
Israel Election: सरकार गठन में अहम हो सकती है जॉइंट अरब लिस्ट की भूमिका
इस चुनाव में जॉइंट अरब लिस्ट भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। गठबंधन के नेता यूसुफ जबारीन ने कहा है कि उनका गठबंधन नेतन्याहू सरकार को सत्ता से बाहर करने का रास्ता तैयार करने के लिए तैयार है। इसराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, जॉइंट अरब लिस्ट को फिलहाल 9.11 फीसदी वोट मिले हैं। वोट शेयर के आधार पर यह चौथा सबसे बड़ा गठबंधन है। ऐसे में नई सरकार के गठन में इसकी भूमिका अहम हो सकती है।
राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने की एक और चुनाव टालने की अपील
चुनाव के बाद बनती राजनीतिक स्थिति के बीच इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने सभी दलों से मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए ताकि देश को एक और चुनाव का सामना न करना पड़े।” आधिकारिक चुनाव नतीजे अगले सप्ताह घोषित किए जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति यह तय करेंगे कि किस राजनीतिक नेता के पास सरकार बनाने की सबसे अधिक संभावना है। राष्ट्रपति की ओर से उसी नेता को सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने का निमंत्रण दिया जाएगा।
इसराइल में गठबंधन सरकार क्यों बनती है?
इसराइल की संसद को कनेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। यहां चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत होते हैं। इसका मतलब है कि किसी राजनीतिक दल को देशभर में जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, लगभग उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें मिलती हैं। इसराइल के इतिहास में अब तक कोई भी राजनीतिक दल अकेले 120 सीटों में बहुमत हासिल नहीं कर पाया है। यही वजह है कि वहां सरकार बनाने के लिए दो या उससे अधिक दलों को गठबंधन करना पड़ता है। इस व्यवस्था में छोटे राजनीतिक दलों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनके समर्थन से ही किसी गठबंधन को बहुमत मिल सकता है। यही दल सरकार बनाने और उसे सत्ता में बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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