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ईरान: बेटी की आंखों के सामने गोली मारकर हत्या, अब विदेश में रहकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रही मां

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Iran: ईरान में अपनी 16 साल की बेटी को सुरक्षाबलों की गोली का शिकार बनते देखने वाली मां समीरा अब देश से बाहर रहकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। कभी राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखने वाली समीरा की जिंदगी बेटी सेवदा की मौत के बाद पूरी तरह बदल गई। उनका आरोप है कि ईरानी अधिकारियों ने बेटी का शव तलाशने से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक उन्हें परेशान किया। अब वह बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की पहचान उजागर कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही हैं।

Iran: प्रदर्शन के दौरान मां के सामने मारी गई बेटी को गोली

समीरा और उनकी 16 वर्षीय बेटी सेवदा 9 जनवरी को तेहरान के बाहरी इलाके में सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। ये प्रदर्शन देश की आर्थिक स्थिति को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों ने इस्लामी गणराज्य को खत्म करने की मांग उठानी शुरू कर दी। समीरा के मुताबिक, उनकी बेटी सेवदा राजनीति में काफी दिलचस्पी रखती थी। वह महसा अमीनी और नीका शाकरामी को अपना आदर्श मानती थी। दोनों युवतियों की मौत के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन के दौरान सेवदा एक कूड़ेदान पर खड़ी होकर लोगों से नारे लगवा रही थी। इसी दौरान एक इमारत की छत से स्नाइपर ने गोली चलाई, जो सेवदा के दिल को चीरते हुए निकल गई। समीरा बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को जमीन पर खून से लथपथ देखा। उसकी आंखें अब भी उनकी ओर देख रही थीं। वह किसी तरह उसे अस्पताल लेकर पहुंचीं, लेकिन वहां उन्हें पता चला कि सेवदा की मौत हो चुकी है।

Iran: कई दिनों तक शवगृहों में तलाशती रहीं बेटी का शव

बेटी की मौत के बाद समीरा को उसका शव तलाशने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उनका कहना है कि अस्पताल से सेवदा का शव कहीं और ले जाया गया था। इसके बाद वह तेहरान के बड़े शवगृहों में पहुंचीं, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के शव रखे हुए थे। हर बैग खोलकर अपनी बेटी को तलाशना उनके लिए बेहद दर्दनाक अनुभव था। आखिरकार उन्हें सेवदा का शव मिल गया। समीरा के मुताबिक, उनकी बेटी का शव तीन अन्य शवों के नीचे रखा हुआ था। ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनों के दौरान 3,000 से अधिक लोगों की मौत की बात स्वीकार की है। वहीं, मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, मृतकों की संख्या 7,000 से अधिक हो सकती है।

बेटी का शव सौंपने के लिए अधिकारियों ने रखी शर्त

समीरा का आरोप है कि अधिकारियों ने बेटी का शव दफनाने के लिए उन्हें एक शर्त मानने को कहा। उनसे यह कहलवाने का दबाव बनाया गया कि सेवदा की मौत सुरक्षाबलों की गोली से नहीं, बल्कि आतंकवादियों की वजह से हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सेवदा की मौत के 40वें दिन की रस्म से पहले उन्हें बुलाया और इंटरव्यू देने के लिए दबाव बनाया। समीरा के मुताबिक, अधिकारियों ने उनसे सेवदा को बसीज का सदस्य बताने और यह कहने को कहा कि प्रदर्शनकारियों ने उसकी हत्या की थी। इसके बदले उन्हें घर और दूसरी सुविधाएं देने का प्रस्ताव भी दिया गया। हालांकि, समीरा ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका कहना था कि वह अपनी बेटी के खून का सौदा नहीं करना चाहती थीं।

पहाड़ों और नदियों को पार कर ईरान से भागीं समीरा

अधिकारियों के कथित दबाव और उत्पीड़न से परेशान होकर समीरा ने ईरान छोड़ने का फैसला किया। 40वें दिन की रस्म पूरी होने के बाद वह मानव तस्करों की मदद से खतरनाक पहाड़ी रास्तों और नदियों को पार कर देश से बाहर निकल गईं। अब वह विदेश में छिपकर रह रही हैं। उनका कहना है कि बेटी की मौत के बाद उनके पास सामान्य जिंदगी में लौटने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

विदेश में रहते हुए भी ईरान में दर्ज हुए कई मुकदमे

समीरा का दावा है कि देश छोड़ने के बाद भी उन्होंने विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देना जारी रखा। इसके बाद ईरान में उनकी गैरमौजूदगी में भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए गए। इनमें ‘मोहारेबेह’ यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप भी शामिल है। ईरान में इस अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। समीरा के मुताबिक, सेवदा के 17वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी अधिकारियों ने छापा मारा। इस दौरान उनके कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया।

बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम कर रहीं उजागर

समीरा अब इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए उन ईरानी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के नाम सार्वजनिक कर रही हैं, जिन्हें वह प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए जिम्मेदार मानती हैं। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि इन लोगों की पहचान सामने आए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। समीरा ने जिन लोगों में से एक का नाम सार्वजनिक किया था, उसकी बाद में मौत हो गई। इसके बाद सरकार समर्थक एक व्यक्ति ने समीरा का ठिकाना बताने वाले को 5,000 डॉलर का इनाम देने की पेशकश भी की थी। इन तमाम धमकियों के बावजूद समीरा अपनी लड़ाई जारी रखने पर अड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि बेटी की मौत का दर्द उन्हें हर दिन परेशान करता है, लेकिन उसी दर्द ने उन्हें न्याय के लिए लड़ने की ताकत भी दी है।

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