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‘दीये जलाने से तेल बर्बाद होता है’, अखिलेश यादव के बयान पर भड़के लोग, योगी के दीपोत्सव का किया समर्थन

अयोध्या में दीपोत्सव के समर्थन में क्या बोले लोग?
अयोध्या में दीपोत्सव के समर्थन में क्या बोले लोग?

Ayodhya Deepotsav: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश में अयोध्या के दीपोत्सव और इसे लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में भव्य दीपोत्सव मनाने की बात कही है। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से दीप जलाने में तेल और घी खर्च होने तथा इस पैसे का इस्तेमाल स्कूल बनाने में करने से जुड़ी टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग अखिलेश यादव के विचारों से असहमति जता रहे हैं, जबकि कुछ ने त्योहार मनाने के साथ पर्यावरण का ध्यान रखने की भी बात कही है। खबर इंडिया के एक मीडिया चैनल पर प्रसारित वीडियो में स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी और योगी सरकार के दीपोत्सव आयोजन का समर्थन किया।

Ayodhya Deepotsav: दिवाली मनाने की परंपरा का दिया हवाला

वीडियो में कई लोगों ने कहा कि दीपावली हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है और इसे मनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लोगों का कहना था कि यह केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। मान्यता के अनुसार, भगवान राम के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। ऐसे में दीप जलाने को तेल और घी की बर्बादी बताना उचित नहीं है।एक व्यक्ति ने कहा कि दिवाली हर साल आने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। त्योहारों के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश भी मिलता है। दिवाली अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है और लोगों को अपने आसपास स्वच्छता रखने तथा रोशनी फैलाने की प्रेरणा देती है।

अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर जताई नाराजगी

वीडियो में मौजूद कई लोगों ने अखिलेश यादव के कथित बयान पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक नेता को धार्मिक त्योहारों को लेकर इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। एक व्यक्ति ने कहा कि अखिलेश यादव खुद को सनातनी बताते हैं, इसलिए उन्हें सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों के महत्व को समझना चाहिए।कुछ लोगों ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को सरकार के कामकाज की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए धार्मिक परंपराओं को निशाना बनाना सही नहीं है। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव की टिप्पणी का उद्देश्य लोगों को बीजेपी और योगी सरकार के खिलाफ करना हो सकता है।

Ayodhya Deepotsav: सैफई महोत्सव को लेकर भी उठाए सवाल

दीपोत्सव पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब में कुछ लोगों ने उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आयोजित सैफई महोत्सव का जिक्र किया। उनका आरोप था कि उस समय सरकारी खर्च पर मुंबई से कलाकारों को बुलाकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। ऐसे में अब दीपोत्सव के खर्च पर सवाल उठाना उचित नहीं है।एक व्यक्ति ने सवाल किया कि जब सैफई में बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, तब सरकारी पैसे से स्कूल बनाने की बात क्यों नहीं उठाई गई? लोगों का कहना था कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को केवल खर्च के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

दीपोत्सव से कुम्हारों और स्थानीय कारीगरों को मिलता है रोजगार

वीडियो में दीपोत्सव के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर भी चर्चा हुई। एक व्यक्ति ने सवाल किया कि क्या अयोध्या में बड़े स्तर पर दीपोत्सव आयोजित होने से कुम्हारों और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों को रोजगार मिलता है?इसके जवाब में एक व्यक्ति ने कहा कि ऐसे आयोजनों से मिट्टी के दीये और दूसरे सामान बनाने वाले कारीगरों को काम मिलता है। दीपोत्सव के लिए बड़ी संख्या में मिट्टी के दीयों और अन्य वस्तुओं की जरूरत होती है। इससे उन लोगों की आजीविका को सहारा मिलता है, जिनका पारंपरिक काम मिट्टी के उत्पाद बनाना है। उनके अनुसार, सरकार के इस तरह के फैसलों से स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है।

Ayodhya Deepotsav: 2027 के चुनाव में योगी और अखिलेश को लेकर क्या बोले लोग?

वीडियो में उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भी लोगों से सवाल किए गए। जब उनसे पूछा गया कि अगले चुनाव के बाद वे योगी आदित्यनाथ या अखिलेश यादव में से किसे मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, तो कई लोगों ने योगी आदित्यनाथ का नाम लिया।कुछ लोगों ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में काफी बदलाव हुए हैं और वे चाहते हैं कि आने वाले समय में भी यही सरकार बनी रहे। वहीं, कुछ लोगों ने अखिलेश यादव की राजनीतिक बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया पर चर्चा में बने रहने से चुनाव नहीं जीते जा सकते। नेताओं को जनता के बीच जाकर जमीनी मुद्दों पर काम करना चाहिए।

रामलीला मैदान को हल्दीघाटी बताने वाले बयान पर भी चर्चा

वीडियो में अखिलेश यादव के रामलीला मैदान को हल्दीघाटी का मैदान बताने से जुड़े बयान पर भी लोगों की प्रतिक्रिया ली गई। कुछ लोगों ने इस तुलना को गलत बताया। उनका कहना था कि रामलीला मैदान को रामलीला मैदान ही कहा जाना चाहिए और हल्दीघाटी का अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है।इस दौरान महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के युद्ध का भी जिक्र हुआ। एक व्यक्ति ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। लोगों ने इस तरह की राजनीतिक टिप्पणियों को अनावश्यक बताते हुए कहा कि इतिहास से जुड़े विषयों पर बयान देते समय तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए।

Ayodhya Deepotsav: पटाखों और प्रदूषण को लेकर भी सामने आई राय

दिवाली के दौरान पटाखे जलाने और उनसे होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी सामने आया। एक व्यक्ति ने कहा कि पटाखों से प्रदूषण फैलता है, लेकिन दिवाली के मौके पर ही इस विषय को अधिक उठाया जाता है। हालांकि, एक अन्य व्यक्ति ने माना कि पटाखों से प्रदूषण बढ़ता है और इस पहलू पर ध्यान देना जरूरी है।इसके बावजूद लोगों ने दीपावली मनाने और दीप जलाने का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि दीये जलाना त्योहार की परंपरा का हिस्सा है और इसे जारी रखना चाहिए। एक व्यक्ति ने उत्साह जताते हुए कहा कि इस बार पिछले साल की तुलना में भी ज्यादा दीये जलाए जाएंगे।

धर्म और राजनीति को लेकर भी हुई तीखी टिप्पणियां

वीडियो में कुछ लोगों ने अखिलेश यादव के साथ राहुल गांधी का भी जिक्र किया और उन पर हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। एक व्यक्ति ने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन किसी भी धर्म और उसकी परंपराओं का अपमान नहीं होना चाहिए।कुछ लोगों ने राम मंदिर आंदोलन के समय कारसेवकों पर गोली चलने की घटना का हवाला देते हुए अखिलेश यादव की आलोचना की। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि नेताओं को धार्मिक मुद्दों पर बयान देने के बजाय जनता की समस्याओं और विकास से जुड़े सवालों पर ध्यान देना चाहिए।कुल मिलाकर, खबर इंडिया के वीडियो में दिवाली, अयोध्या के दीपोत्सव, सरकारी खर्च, स्थानीय कारीगरों के रोजगार और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। वीडियो में शामिल अधिकांश लोगों ने दीपावली मनाने और अयोध्या में भव्य दीपोत्सव आयोजित करने का समर्थन किया। हालांकि, पटाखों से होने वाले प्रदूषण और सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए।