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बिहार में बाढ़ से बचाव और सड़क निर्माण का नया प्लान, सरकार और एनएचएआई के समझौते से कैसे मिलेगा फायदा?

नदियों की सफाई से मजबूत होगा बिहार का सड़क नेटवर्क
नदियों की सफाई से मजबूत होगा बिहार का सड़क नेटवर्क

Bihar Highway Project: बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या को कम करने और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की लागत घटाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत नदियों और जलाशयों से गाद निकालकर उसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाएगा। इससे एक तरफ नदियों की पानी बहाने की क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ सड़कों के निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

Bihar Highway Project: केंद्र और बिहार सरकार के बीच हुआ समझौता

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने 3 नवंबर को इस योजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का नाम ‘नदी संजीवनी, नदी पुनर्जीवन, सड़क नवनिर्माण’ रखा गया है। इसका उद्देश्य बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की दो बड़ी समस्याओं का एक साथ समाधान करना है। इसके तहत नदियों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी और इसे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।बिहार के कई हिस्सों से गंगा, कोसी, गंडक, फल्गु और बागमती जैसी प्रमुख नदियां गुजरती हैं। इनमें हर साल बड़ी मात्रा में गाद जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी बहाने की क्षमता कम होती है और राज्य में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, गाद जमा होने से जल प्रबंधन करना भी मुश्किल हो जाता है।

सड़क निर्माण में सामग्री की कमी होगी दूर

एनएचएआई को बिहार में राजमार्ग और एक्सप्रेसवे बनाने के लिए मिट्टी और गिट्टी जैसी निर्माण सामग्री जुटाने में काफी परेशानी होती है। विजन 2047 के तहत राज्य में कई बड़ी सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनके लिए भारी मात्रा में इन सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी। इनकी कमी के कारण कई बार निर्माण कार्य में देरी होती है। ठेकेदारों को दूर-दराज के इलाकों से सामग्री मंगवानी पड़ती है, जिससे समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं। इसका असर परियोजनाओं की कुल लागत पर भी पड़ता है।नई योजना के तहत एनएचएआई के ठेकेदार आसपास की नदियों से मुफ्त में गाद निकाल सकेंगे और इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में कर सकेंगे। इससे निर्माण सामग्री की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। वहीं, नदियों से अतिरिक्त गाद निकलने के बाद उनकी पानी बहाने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे बाढ़ का खतरा कम हो सकता है।

Bihar Highway Project: कितनी बड़ी है योजना?

फिलहाल एनएचएआई बिहार में 58,340 करोड़ रुपये की लागत से 1,561 किलोमीटर लंबी 39 सड़क परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसके अलावा, राज्य में 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबी 11 नई परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। इन सभी परियोजनाओं में सड़क के आसपास मिट्टी भरने, तटबंध बनाने और सड़क की शुरुआती परत तैयार करने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी या गाद की जरूरत होगी।अधिकारियों के मुताबिक, समझौते के तहत बिहार में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 393 लाख घन मीटर गाद का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, भविष्य की परियोजनाओं के लिए करीब 1,050 लाख घन मीटर गाद इस्तेमाल करने की योजना है।एनएचएआई के एक अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल राज्य में बन रहे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। यह गाद मुफ्त में मिलने से सड़क निर्माण की लागत कम होगी। साथ ही, वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से नदियों की पानी बहाने की क्षमता बढ़ेगी और हर साल आने वाली बाढ़ का खतरा कम करने में मदद मिलेगी।

Bihar Highway Project: बिहार में गाद से बनेंगे हाईवे, घटेगा बाढ़ का खतरा
बिहार में गाद से बनेंगे हाईवे, घटेगा बाढ़ का खतरा
सड़क निर्माण में पहले भी हुआ है कचरे का इस्तेमाल

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पहले से ही फ्लाई ऐश, प्लास्टिक कचरे और निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे जैसी बेकार सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इनका उपयोग तभी किया जाता है, जब ये सामग्री उपलब्ध हो और निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त हो।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 5 फरवरी को लोकसभा में बताया था कि 2021-22 से 2024-25 के बीच प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करके कुल 3,117 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए। इससे पहले 2020-21 में प्लास्टिक कचरे की मदद से सबसे ज्यादा करीब 781 किलोमीटर सड़क बनाई गई थी। इसके बाद 2021-22 में 697 किलोमीटर, 2022-23 में 673 किलोमीटर, 2023-24 में 694 किलोमीटर और 2024-25 में 274 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया।

Bihar Highway Project: महाराष्ट्र के बुलढाणा मॉडल से मिली प्रेरणा

बिहार सरकार और केंद्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने इस योजना को तैयार करने के लिए महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में अपनाए गए मॉडल से प्रेरणा ली है। यह मॉडल बाद में ‘बुलढाणा पैटर्न’ के नाम से मशहूर हुआ। इसके तहत तालाबों और नदियों से मिट्टी निकालकर उसका इस्तेमाल राजमार्गों के निर्माण में किया गया था। इससे जलाशयों और तालाबों की सफाई के साथ उनकी गहराई और पानी जमा करने की क्षमता भी बढ़ी।केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, महाराष्ट्र में इस पहल के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में 225 लाख घन मीटर मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था। इसके लिए जलाशयों और तालाबों को चौड़ा और गहरा किया गया, जिससे उनकी पानी जमा करने की क्षमता में 22,500 हजार घन मीटर की बढ़ोतरी हुई। इस पूरे काम पर राज्य सरकार को कोई खर्च नहीं करना पड़ा। इसी तरह की पहल नागपुर और वर्धा जिलों के 60 गांवों में भी की गई थी।

इन नदियों से निकाली जाएगी गाद

समझौते के तहत बिहार की कई प्रमुख नदियों से गाद निकालने का काम किया जाएगा। इनमें गंगा, गंडक, धमही, घोघरी, भुतही, फल्गु, कोसी, सोन और घाघरा समेत कई नदियां शामिल हैं। इन नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल राज्य में चल रही और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा।

Bihar Highway Project: इन राजमार्ग परियोजनाओं में होगा इस्तेमाल

इस योजना के तहत गाद का इस्तेमाल बिहार की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में किया जाएगा। इनमें चार लेन वाला मणिकपुर-साहेबगंज राजमार्ग, चार लेन वाला बाकरपुर-मणिकपुर राजमार्ग, मुंगेर-मिर्जाचौकी, भागलपुर बाईपास-रसूलपुर, उमगांव-सहरसा और किशनगंज-बहादुरगंज राजमार्ग शामिल हैं। इसके अलावा छह लेन वाला वाराणसी-रांची-कोलकाता राजमार्ग, चार लेन वाला साहेबगंज-अरेराज-बेतिया और चार लेन वाला भागलपुर-खरहरा (ढाका मोड़) राजमार्ग भी इस योजना का हिस्सा हैं।

विजन 2047 के तहत बनेंगे 1,800 किलोमीटर एक्सप्रेसवे

विजन 2047 के तहत एनएचएआई ने बिहार में करीब 1,800 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे बनाने की योजना भी तैयार की है। इसका उद्देश्य राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को एक्सप्रेसवे की सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के मुताबिक, इन एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद बिहार में कहीं भी रहने वाले लोगों को 50 किलोमीटर के दायरे में एक एक्सप्रेसवे की सुविधा मिल सकेगी।अगर नदियों से गाद निकालने और उसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने की यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में इन एक्सप्रेसवे के निर्माण में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। इससे नदियों से अतिरिक्त गाद हटेगी, उनकी पानी बहाने की क्षमता बेहतर होगी और सड़क निर्माण के लिए जरूरी सामग्री भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इस तरह यह पहल बिहार में बाढ़ की समस्या कम करने और सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने, दोनों में मददगार साबित हो सकती है।