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ईरान जंग से ट्रंप को चुनावी झटका, फिर भी दोबारा हमले की बात क्यों कही? समझिए पूरा मामला

US Midterm Elections: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ जारी जंग ने उनकी पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया। इसके बावजूद उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिले, तो वह फिर हमला करेंगे।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी था। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार बताया है। ऐसे में सवाल है कि आखिर ईरान युद्ध अमेरिकी मतदाताओं के लिए इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना? डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप की सत्ता और फैसलों पर क्या असर पड़ेगा? आइए, सवाल-जवाब में पूरा मामला समझते हैं।

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में क्या हुआ?

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव हुए। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हुआ। नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया। इसका मतलब है कि अब संसद के दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के बजाय विपक्षी डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा। गवर्नर पद के चुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, मतगणना के दौरान अलग-अलग सीटों पर आंकड़े बदलते रहे। इसलिए शुरुआती सीटों के आंकड़ों को अंतिम नतीजा मानने के बजाय सदनों में बहुमत हासिल होने को सबसे अहम राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखना चाहिए।

US Midterm Elections: मिडटर्म चुनाव क्या होते हैं और ये क्यों अहम हैं?

अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच यानी लगभग दो साल बाद होने वाले चुनावों को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की करीब एक-तिहाई सीटों पर मतदान होता है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय पदों के चुनाव भी होते हैं। मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के पद का चुनाव नहीं होता, लेकिन इसके नतीजे राष्ट्रपति की राजनीतिक ताकत और कामकाज को प्रभावित करते हैं। अगर राष्ट्रपति की पार्टी संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो देती है, तो उसे कानून बनाने, बजट पास कराने और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में विपक्ष का सामना करना पड़ता है।

ट्रंप ने ईरान युद्ध को हार की वजह क्यों माना?

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान युद्ध का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा। उन्होंने माना कि सैन्य कार्रवाई के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिसका असर मतदाताओं पर पड़ा। युद्ध के दौरान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी। पेट्रोल महंगा होने से परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है। ऐसे में मतदाताओं ने युद्ध के आर्थिक असर को चुनावी मुद्दा बनाया।

डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार में भी ईरान युद्ध और बढ़ती लागत को मुद्दा बनाया। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे केवल युद्ध ही एक कारण नहीं था। महंगाई, जीवन-यापन का खर्च और ट्रंप प्रशासन के कामकाज को लेकर असंतोष जैसे मुद्दे भी चुनाव में अहम रहे।

US Midterm Elections: ट्रंप ने हार स्वीकार करने के बाद भी दोबारा हमले की बात क्यों कही?

चुनावी नुकसान स्वीकार करने के बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया। उनका तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिलता, तो वह फिर वही कदम उठाते। उनके मुताबिक, युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में कुछ समय के लिए बढ़ोतरी हुई, लेकिन लंबे समय में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ज्यादा जरूरी है। यानी ट्रंप ने चुनावी नुकसान और युद्ध की आर्थिक कीमत को स्वीकार किया, लेकिन अपनी सैन्य रणनीति बदलने का संकेत नहीं दिया। उनका बयान बताता है कि फिलहाल वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी कार्रवाई का प्रमुख आधार मान रहे हैं।

US Midterm Elections
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उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?

रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी की हार की वजह ईरान युद्ध है। वेंस के मुताबिक, चुनावी नतीजों पर चर्चा करते समय सबसे पहले युद्ध के असर को समझना होगा। उनका बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि वह ट्रंप प्रशासन का हिस्सा हैं और युद्ध के मुद्दे पर उनकी टिप्पणी पार्टी के भीतर की चिंता को सामने लाती है। वहीं ट्रंप ने भी वेंस की बात को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने माना कि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से चुनावी नुकसान हुआ होगा। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई को जरूरी बताते हुए अपना रुख बरकरार रखा।

US Midterm Elections: संसद के दोनों सदनों में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को क्या ताकत मिलेगी?

अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर निगरानी रखने और उन्हें चुनौती देने के ज्यादा मौके मिलेंगे। पहला- प्रशासन की जांच: डेमोक्रेट्स संसदीय समितियों के जरिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों, फैसलों और सरकारी कामकाज की जांच कर सकते हैं। अधिकारियों को सवालों के जवाब देने के लिए बुलाया जा सकता है। दूसरा- नियुक्तियों पर असर: राष्ट्रपति कई बड़े अधिकारियों और संघीय न्यायाधीशों के नाम प्रस्तावित करते हैं। इनमें से कई नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। सीनेट में बहुमत होने से डेमोक्रेट्स इन नियुक्तियों पर सवाल उठा सकते हैं और उन्हें रोक भी सकते हैं।

तीसरा- कानून और बजट: कोई भी विधेयक कानून बनने के लिए दोनों सदनों की प्रक्रिया से गुजरता है। ऐसे में डेमोक्रेट्स ट्रंप की नीतियों से जुड़े विधेयकों और बजट प्रस्तावों पर अपनी भूमिका मजबूत कर सकते हैं। चौथा- राष्ट्रपति के वीटो की चुनौती: ट्रंप किसी विधेयक को वीटो कर सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकते हैं। केवल साधारण बहुमत से ऐसा नहीं किया जा सकता। इस तरह डेमोक्रेट्स की जीत ट्रंप के लिए संसद में काम करना मुश्किल बना सकती है, लेकिन इससे राष्ट्रपति के अधिकार अपने आप खत्म नहीं हो जाते।

क्या डेमोक्रेट्स की जीत से ईरान युद्ध रुक जाएगा?

संसद में बहुमत बदलने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई तुरंत रुक जाएगी। विदेश नीति और सैन्य फैसलों में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि, कांग्रेस बजट, रक्षा खर्च, कानून और प्रशासनिक निगरानी के जरिए सरकार पर दबाव बना सकती है।

डेमोक्रेट्स युद्ध की लागत, सैन्य कार्रवाई के औचित्य और उसके परिणामों पर सवाल उठा सकते हैं। वे प्रशासन से जवाब मांग सकते हैं और युद्ध से जुड़े खर्च पर बहस को आगे बढ़ा सकते हैं। लेकिन सैन्य कार्रवाई का भविष्य केवल चुनावी नतीजों से तय नहीं होगा। इसके लिए अमेरिका की रणनीति, ईरान के साथ बातचीत, क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के बीच तनाव जैसे पहलू भी अहम होंगे।

क्या ट्रंप की चुनावी हार का असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा?

अमेरिका की घरेलू राजनीति का असर उसकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। ईरान युद्ध के कारण तेल और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। कनाडा जैसे देशों ने भी अमेरिकी चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स के बहुमत का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप की ओर से लिए गए सभी व्यापारिक या विदेश नीति से जुड़े फैसले अपने आप बदल जाएंगे। ट्रंप प्रशासन को अब अपने फैसलों पर संसद में ज्यादा सवालों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन किसी नीति में बदलाव होगा या नहीं, यह आगे होने वाली राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है और ईरान युद्ध इस चुनाव का एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। ट्रंप ने युद्ध के आर्थिक असर को स्वीकार किया, लेकिन सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए दोबारा ऐसा करने की बात कही। अब सबसे बड़ा सवाल यह  कि संसद में विपक्ष की मजबूत स्थिति के बीच ट्रंप अपनी नीतियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष का भविष्य क्या होता है।

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