Donald Trump: अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका 2026 के अंत तक इजरायल को दी जाने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना सैन्य सहायता बंद कर देगा। ट्रंप का कहना है कि इजरायल अब आर्थिक रूप से मजबूत देश बन चुका है और उसे अमेरिकी करदाताओं के पैसे की जरूरत नहीं है। यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि ट्रंप को लंबे समय से इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का मजबूत समर्थक माना जाता रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर ट्रंप ने यह फैसला क्यों लिया? क्या अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में दरार आ रही है? इस फैसले से नेतन्याहू की मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी और क्या अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले ही सैन्य मदद रोक सकते हैं? आइए सवाल-जवाब में पूरा मामला समझते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को लेकर क्या ऐलान किया है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 नवंबर 2026 को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका इजरायल को दी जाने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना सैन्य सहायता बंद कर देगा। उनके मुताबिक, यह मदद साल के अंत तक समाप्त हो जाएगी।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस बारे में पहले ही बातचीत की है और दोनों के बीच सहायता को खत्म करने पर सहमति बनी है। ट्रंप का तर्क है कि इजरायल अब एक समृद्ध और सफल देश है। इसलिए उसे अमेरिकी आर्थिक सहायता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सहायता बंद करने की पूरी प्रक्रिया क्या होगी और मौजूदा समझौते के रहते इसे किस तरह लागू किया जाएगा।
Donald Trump: अमेरिका इजरायल को हर साल कितनी सैन्य मदद देता है?
अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य सहयोग कई दशकों पुराना है। इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता का मौजूदा ढांचा 2016 में हुए 10 वर्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित है। यह समझौता वित्त वर्ष 2019 से 2028 तक के लिए है। इसके तहत अमेरिका ने इजरायल को कुल 38 अरब डॉलर की सैन्य सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसमें हर साल औसतन 3.8 अरब डॉलर शामिल हैं।
इस सहायता को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है: 3.3 अरब डॉलर: फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग (FMF) के तहत सैन्य उपकरण और सेवाएं खरीदने के लिए। 500 मिलियन डॉलर: मिसाइल रक्षा प्रणालियों के विकास और मजबूती के लिए। इसका मतलब है कि अमेरिका इजरायल को हर साल 3.8 अरब डॉलर की सहायता देता है, जिसे ट्रंप ने अपने बयान में करीब 4 अरब डॉलर बताया है। यह पूरा पैसा इजरायल को सामान्य खर्च के लिए नकद नहीं दिया जाता। इसका बड़ा हिस्सा अमेरिकी रक्षा कंपनियों से हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने में इस्तेमाल होता है।
ट्रंप अचानक इजरायल की मदद क्यों बंद करना चाहते हैं?
ट्रंप के बयान के पीछे आर्थिक और घरेलू राजनीतिक दोनों कारण बताए जा रहे हैं। उन्होंने खुद कहा कि इजरायल अब आर्थिक रूप से इतना मजबूत है कि वह अपनी सैन्य जरूरतों के लिए खुद खर्च कर सकता है। लेकिन इसके साथ अमेरिका की घरेलू राजनीति भी जुड़ी हुई है। गाजा युद्ध के बाद अमेरिका में इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता को लेकर बहस तेज हुई है। अमेरिकी मतदाताओं के एक वर्ग और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इजरायल को अमेरिकी मदद दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। ट्रंप ने अपने इंटरव्यू में मिशिगन के डेमोक्रेटिक नेता अब्दुल अल-सैयद का भी जिक्र किया।
Donald Trump: क्या अमेरिकी मदद बंद होने से इजरायल की सैन्य ताकत कमजोर होगी?
अमेरिकी सैन्य सहायता इजरायल की रक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इस मदद से इजरायल अमेरिकी कंपनियों से लड़ाकू विमान, गोला-बारूद, सैन्य तकनीक और अन्य उपकरण खरीदता है। इसके अलावा आयरन डोम जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियों के विकास में भी अमेरिकी सहयोग की भूमिका रही है। अगर यह सहायता बंद होती है, तो इजरायल को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए ज्यादा पैसा खुद खर्च करना पड़ सकता है। इससे उसके रक्षा बजट पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका इजरायल को हथियार बेचना भी बंद कर देगा। ट्रंप ने संकेत दिया है कि सहायता समाप्त होने के बाद भी अमेरिका इजरायल को हथियार बेच सकता है। यानी दोनों देशों के बीच सैन्य व्यापार जारी रह सकता है, लेकिन अमेरिकी आर्थिक सहायता का मौजूदा स्वरूप बदल सकता है। इस अंतर को समझना जरूरी है। सहायता बंद होने और हथियारों की बिक्री बंद होने का मतलब एक जैसा नहीं है।
क्या ट्रंप के फैसले से नेतन्याहू की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ेंगी?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह घोषणा राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी रहा है। ऐसे में सैन्य सहायता बंद करने की घोषणा इजरायल की सुरक्षा नीति और नेतन्याहू के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर सकती है।
इजरायल के विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर नेतन्याहू की आलोचना की है। पूर्व सैन्य प्रमुख और विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट ने अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े बदलाव की जानकारी इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों और नागरिकों को मीडिया के जरिए क्यों मिल रही है। वहीं, यायर गोलन ने भी अमेरिकी सहायता रोकने की घोषणा को इजरायल की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि नेतन्याहू इस बदलाव पर पहले से चर्चा कर चुके हैं और सहायता को धीरे-धीरे समाप्त करने के विचार से सहमत हैं। ऐसे में असली सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच इस बदलाव की शर्तें क्या होंगी।

Donald Trump: क्या ट्रंप अकेले ही अमेरिकी सैन्य सहायता रोक सकते हैं?
यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक पहलू है। अमेरिकी राष्ट्रपति विदेश नीति और दूसरे देशों के साथ संबंधों को लेकर बड़े फैसले ले सकते हैं, लेकिन सरकारी खर्च और बजट का मामला केवल राष्ट्रपति के अधिकार में नहीं आता। अमेरिका में बजट और सरकारी खर्च को मंजूरी देने की महत्वपूर्ण शक्ति कांग्रेस के पास है। इजरायल के साथ 2016 में हुआ मौजूदा 10 वर्षीय समझौता भी अमेरिकी कांग्रेस द्वारा धन आवंटित किए जाने की शर्त से जुड़ा है। इसलिए ट्रंप की घोषणा को तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका फैसला नहीं माना जा सकता। इसके लिए बजटीय और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मौजूदा समझौता 2028 तक के लिए है, ऐसे में 2026 के अंत में सहायता रोकने के तरीके और कानूनी आधार को लेकर सवाल बने हुए हैं।यानी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद भी यह देखना होगा कि अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस इसे किस तरह लागू करते हैं।
क्या अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में दरार आ रही है?
ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसे सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध खत्म होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। अमेरिका इजरायल का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, खुफिया जानकारी, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सहयोग है। ट्रंप ने भी अपने बयान में कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा और हथियारों की बिक्री जारी रह सकती है। इसलिए फिलहाल मामला सैन्य सहायता के मौजूदा वित्तीय ढांचे को बदलने का है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में अमेरिका इजरायल को सीधे आर्थिक सहायता देने के बजाय रक्षा तकनीक, हथियारों की बिक्री और संयुक्त सैन्य परियोजनाओं पर कितना जोर देता है।
Donald Trump: क्या इजरायल अब अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम कर पाएगा?
इजरायल लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। नेतन्याहू भी पहले अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने की इच्छा जता चुके हैं। लेकिन अमेरिकी सहायता का विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। इजरायल को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अतिरिक्त बजट जुटाना होगा। साथ ही हथियारों के उत्पादन, मिसाइल रक्षा प्रणालियों और सैन्य तकनीक में निवेश बढ़ाना पड़ सकता है। इसके अलावा मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति भी इजरायल के रक्षा खर्च को प्रभावित करती है। ऐसे में अमेरिकी सहायता में अचानक बदलाव उसके लिए वित्तीय और रणनीतिक चुनौती बन सकता है।
ट्रंप का ऐलान कितना बड़ा बदलाव साबित होगा?
डोनाल्ड ट्रंप का इजरायल को दी जाने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना सैन्य सहायता बंद करने का ऐलान अमेरिका-इजरायल संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। इसके पीछे इजरायल की आर्थिक स्थिति, अमेरिकी घरेलू राजनीति और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति जैसे पहलू दिखाई देते हैं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा समझौते के रहते सहायता बंद करने की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी। कांग्रेस की भूमिका और दोनों देशों के बीच आगे होने वाली बातचीत इस फैसले की दिशा तय करेगी। फिलहाल इतना साफ है कि अगर अमेरिकी सहायता का मौजूदा ढांचा बदलता है, तो इजरायल को अपनी रक्षा जरूरतों और सैन्य बजट की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। इसका असर केवल दोनों देशों के रिश्तों पर नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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