Home » एक्सप्लनेर » RSS का नया मिशन: सोशल मीडिया से जेन Z तक, इंदौर बैठक में बने 6 बड़े प्लान; BJP की क्या है चिंता?

RSS का नया मिशन: सोशल मीडिया से जेन Z तक, इंदौर बैठक में बने 6 बड़े प्लान; BJP की क्या है चिंता?

RSS Indore Meeting: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक हुई बैठक कई अहम मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। सोशल मीडिया पर बन रहे नैरेटिव, जेन Z यानी नई युवा पीढ़ी, विदेशी फंडिंग, उत्तर प्रदेश में UGC के प्रस्तावित नियमों को लेकर नाराजगी, पंजाब की राजनीति और पुराने स्वयंसेवकों को फिर संगठन से जोड़ने जैसे विषय चर्चा में रहे।

खास बात यह रही कि बैठक में RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राज्यों के संगठन मंत्री भी शामिल हुए। इससे इन चर्चाओं का राजनीतिक और संगठनात्मक महत्व बढ़ जाता है। हालांकि, बैठक में हुई हर चर्चा को BJP की आधिकारिक चुनावी रणनीति मानना सही नहीं होगा। रिपोर्ट में सामने आए छह मुद्दों के आधार पर समझते हैं कि संघ की प्राथमिकताएं क्या हैं और इनका BJP के लिए क्या मतलब हो सकता है।

 RSS Indore Meeting: RSS सोशल मीडिया पर नजर क्यों रखना चाहता है?

इंदौर बैठक में नए मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर चलने वाले कंटेंट को लेकर चर्चा हुई। इसकी वजह यह है कि अब किसी मुद्दे को लेकर जनमत बनाने में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। युवा पीढ़ी खासतौर पर इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बात रखती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि सरकार और संगठन के खिलाफ सोशल मीडिया पर कौन से नैरेटिव चल रहे हैं और उनका जवाब किस तरह दिया जाए। इसके लिए RSS की अलग निगरानी टीम बनाने का विचार भी सामने आया, हालांकि इसका ढांचा और गठन अभी तय नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी सोशल मीडिया पर अनावश्यक कंटेंट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसके इस्तेमाल को लेकर परिवार और समाज में जागरूकता जरूरी है।

RSS जेन Z के बीच अपनी पहुंच क्यों बढ़ाना चाहता है?

जेन Z यानी नई युवा पीढ़ी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखने के लिए जानी जाती है। रोजगार, परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और राजनीतिक मुद्दों पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन ने संगठनों और राजनीतिक दलों के सामने संवाद की नई चुनौती खड़ी की है। इसी संदर्भ में RSS युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उनकी चिंताओं को समझने पर जोर दे रहा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि युवाओं की भाषा, उनकी जरूरतों और उनके सवालों को समझना जरूरी है।

 RSS Indore Meeting
                                                       RSS Indore Meeting

बैठक के बाद दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सवाल उठाने या अपनी समस्याएं सामने रखने से कोई युवा राष्ट्रविरोधी नहीं हो जाता। युवाओं से लगातार संवाद होना चाहिए और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। यानी संघ की ओर से युवाओं को केवल अपने विचार समझाने के बजाय उनकी बात सुनने और उनके साथ संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

 RSS Indore Meeting: आंदोलनों में विदेशी हस्तक्षेप और फंडिंग का मुद्दा क्यों उठा?

बैठक में देश के आंतरिक मामलों में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप और आंदोलनों के पीछे संभावित विदेशी भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। RSS की बैठक से पहले जारी आधिकारिक जानकारी में भी बाहरी हस्तक्षेप को चर्चा के विषयों में शामिल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आंदोलनों की फंडिंग और उनके पीछे सक्रिय संगठनों की भूमिका की जांच की जरूरत पर विचार किया गया। विदेशी फंडिंग पर सख्त निगरानी और कानूनी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा होने की बात कही गई है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि किसी आंदोलन में विदेशी फंडिंग होने का संदेह और उसका प्रमाणित होना दो अलग बातें हैं। किसी प्रदर्शन या आंदोलन को विदेशी मदद से संचालित बताने के लिए जांच और विश्वसनीय सबूत जरूरी हैं। फिलहाल इस रिपोर्ट में जिन संभावित सबूतों का जिक्र है, उनका सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए विदेशी फंडिंग को लेकर सामने आई बातों को आरोप और आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए, किसी स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं।

UGC के नए नियमों को लेकर BJP और RSS की चिंता क्या है?

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से UGC के नए नियमों का मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में नए नियम अधिसूचित किए थे। इनका नाम UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 है।

इन नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि नियमों के कुछ प्रावधान भेदभावपूर्ण हो सकते हैं। दूसरी ओर, सामाजिक न्याय से जुड़े संगठनों ने जातिगत भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार तथा UGC को नोटिस जारी किया था। अदालत ने नियमों की भाषा और उनके दुरुपयोग की आशंका पर सवाल उठाए थे।  RSS को आशंका है कि इन नियमों को लेकर उपजी नाराजगी उत्तर प्रदेश में BJP के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संघ ने नियमों के मौजूदा स्वरूप को संतुलित नहीं माना।

 RSS Indore Meeting: पंजाब में RSS की रणनीति BJP से किस तरह अलग हो सकती है?

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए RSS और BJP की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की बात रिपोर्ट में सामने आई है। पंजाब की राजनीति के मुद्दे उत्तर प्रदेश या पश्चिम बंगाल से अलग हैं। यहां नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था, हथियारों की तस्करी और अलगाववाद जैसे विषय राजनीतिक बहस में जगह बनाते रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, RSS का जोर पंजाब में संगठनात्मक और सामाजिक स्तर पर इन मुद्दों को समझने पर है। वहीं BJP नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बना सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि इस बार पंजाब में तत्काल चुनावी जीत से ज्यादा इन मुद्दों को राष्ट्रीय और राजनीतिक चर्चा में लाना प्राथमिकता हो सकती है।

 RSS Indore Meeting
                                                     RSS Indore Meeting
पुराने स्वयंसेवकों को फिर संगठन से जोड़ने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

RSS के सामने एक और संगठनात्मक चुनौती पुराने और नाराज स्वयंसेवकों को फिर से सक्रिय करने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यकर्ताओं से पुराने स्वयंसेवकों से संपर्क करने, उनकी सलाह सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया।

इसके पीछे संगठन के भीतर संवाद और संपर्क को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में राम मंदिर आंदोलन सहित अलग-अलग मुद्दों पर संगठन से दूरी बनाने वाले कुछ पुराने कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। किसी भी बड़े संगठन के लिए पुराने कार्यकर्ताओं का अनुभव और सक्रियता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उन्हें फिर से जोड़ने की कोशिश को संगठनात्मक विस्तार और एकजुटता के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

 RSS Indore Meeting: इंदौर बैठक से BJP को क्या संदेश मिलता है?

RSS और BJP अलग-अलग संगठन हैं, लेकिन कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर दोनों के बीच संवाद और समन्वय रहता है। इंदौर की बैठक में BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राज्यों के संगठन मंत्रियों की मौजूदगी का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। इससे बैठक की चर्चाओं का राजनीतिक महत्व भी सामने आता है।

छह मुद्दों को एक साथ देखें तो RSS की प्राथमिकताओं में तीन बातें प्रमुख दिखाई देती हैं- युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाना, सोशल मीडिया और नए संचार माध्यमों को समझना तथा संगठनात्मक संपर्क मजबूत करना। इसके साथ ही विदेशी हस्तक्षेप, सामाजिक मुद्दों और अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई।

बैठक के हर मुद्दे को BJP की चुनावी रणनीति कहना जल्दबाजी होगी। संघ की आधिकारिक जानकारी में बैठक का मुख्य एजेंडा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, संगठन का विस्तार, शाखाओं को मजबूत करना और पंच परिवर्तन को समाज तक पहुंचाना बताया गया था। युवाओं, नए मीडिया प्लेटफॉर्म और बाहरी हस्तक्षेप जैसे विषय भी आधिकारिक चर्चा में शामिल थे।

इंदौर की बैठक का संदेश सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है। यह बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल में RSS की पहुंच, संवाद और संगठन को मजबूत करने की कोशिशों की ओर भी इशारा करती है। अब देखना होगा कि युवाओं और सोशल मीडिया को लेकर बनी सोच जमीन पर किस तरह लागू होती है और इसका BJP की राजनीतिक गतिविधियों पर कितना असर पड़ता है।

ये भी पढ़े… ईरान जंग से ट्रंप को चुनावी झटका, फिर भी दोबारा हमले की बात क्यों कही? समझिए पूरा मामला