Digvijay Singh: चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुरू हुआ ‘वोट चोरी’ विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 12 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की थी। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्या आरोप हैं
दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि SIR से जुड़े कई फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों से पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना लिए गए। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हालांकि ये आंकड़े और आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए दावे हैं, जिन पर अदालत में सुनवाई होनी है।
Digvijay Singh: ECINET और ERO की भूमिका पर सवाल
याचिका में चुनाव आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म और Electoral Registration Officers यानी EROs की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दिग्विजय सिंह का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की वैधानिक प्रक्रिया में EROs की भूमिका निर्धारित है, लेकिन SIR के दौरान इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि EROs को ECINET के जरिए डेटा अपडेट करने से रोका गया।
Form 6 और Form 7 को लेकर आपत्ति
दिग्विजय सिंह ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाया है। उनके अनुसार ऑनलाइन Form 6 में पुराने SIR की मतदाता सूची में आवेदक या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया। उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताया है। Form 7 के जरिए नाम हटाने की आपत्तियों को लेकर भी उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल कर नाम हटाए गए और उचित सत्यापन नहीं किया गया।
Digvijay Singh: सुप्रीम कोर्ट से क्या चाहते हैं दिग्विजय सिंह
याचिका में SIR प्रक्रिया की न्यायिक जांच और मतदाता सूची में हटाए गए नामों की जानकारी सार्वजनिक करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। विपक्ष की अलग याचिकाओं में भी हटाए गए मतदाताओं की बूथवार जानकारी, नाम हटाने का कारण और बिना नोटिस किसी मतदाता का नाम नहीं हटाने जैसी मांगें सामने आई हैं। दिग्विजय सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र से जवाब मांगा है। अब मामले में अदालत के सामने आयोग का पक्ष और याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
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