Home » बिहार » बिहार विधान परिषद में 100 से ज्यादा कर्मचारियों की एंट्री रोकी, नौकरी पर लटकी तलवार; भर्ती में गड़बड़ी का आरोप

बिहार विधान परिषद में 100 से ज्यादा कर्मचारियों की एंट्री रोकी, नौकरी पर लटकी तलवार; भर्ती में गड़बड़ी का आरोप

Bihar Recruitment Scam:

Bihar Recruitment Scam: बिहार विधान परिषद में पहले हुई भर्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में 100 से ज्यादा नवनियुक्त कर्मचारियों को विधान परिषद परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। इन कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थी। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका के बीच अचानक प्रवेश रोके जाने से कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रभावित कर्मचारियों में निजी सहायक, स्टेनोग्राफर और डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं।

Bihar Recruitment Scam: अचानक रोकी गई एंट्री, परिसर के पार्क में बैठे कर्मचारी

विधान परिषद परिसर में प्रवेश नहीं मिलने के बाद सभी कर्मचारी अंदर बने पार्क में बैठ गए। कर्मचारी जल्द से जल्द जॉइनिंग कराने और काम करने का मौका देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रवेश रोकने के संबंध में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। एक कर्मचारी के मुताबिक, नियुक्ति से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में 3 नवंबर को सुनवाई भी हुई थी। कर्मचारी का दावा है कि अदालत के आदेश की जानकारी विधान परिषद के सचिव को भी दी गई थी। इसके बावजूद करीब दो महीने बाद अचानक उन्हें परिसर में आने से रोक दिया गया। कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी अधिकारियों के निर्देशों का हवाला देकर कर्मचारियों को अंदर जाने से रोक रहे हैं।

Bihar Recruitment Scam: शॉर्टहैंड परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे 7 कर्मचारी

इस पूरे विवाद की शुरुआत शॉर्टहैंड परीक्षा से जुड़े एक मामले के बाद हुई। जानकारी के मुताबिक, पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में नियुक्त सात कर्मचारियों की शॉर्टहैंड योग्यता पर सवाल उठे थे। संबंधित पदों के लिए शॉर्टहैंड का ज्ञान अनिवार्य था।आरोप है कि इसके बावजूद सातों कर्मचारियों को परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया था। मामला सामने आने के बाद उन्हें दोबारा शॉर्टहैंड परीक्षा के लिए बुलाया गया।

परीक्षा के दिन एक भी कर्मचारी नहीं पहुंचा

दोबारा शॉर्टहैंड परीक्षा आयोजित करने के लिए पूरी तैयारी की गई थी। परीक्षा की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे और परिसर में कैमरे भी लगाए गए थे। हालांकि, परीक्षा के दिन सातों में से एक भी कर्मचारी शामिल नहीं हुआ। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरे हो गए। अब 100 से ज्यादा कर्मचारियों को विधान परिषद परिसर में प्रवेश से रोके जाने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। हालांकि, सभी कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके भविष्य को लेकर जांच तथा आगे की कार्रवाई की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

अवधेश नारायण सिंह ने सितंबर में दिया था इस्तीफा

बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सितंबर के अंत में अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद सभापति का पद खाली है। फिलहाल जेडीयू नेता डॉ. रामबचन राय उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी और जॉइनिंग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका की जांच और संबंधित आदेशों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यह भी पढ़े- PM मोदी से परिवार के साथ मिलने पहुंचे सूर्यकुमार यादव, प्रधानमंत्री ने शेयर किया खास वीडियो