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E20 नहीं, E30 पेट्रोल बिकने का दावा, कर्नाटक सरकार ने उठाए सवाल; उपभोक्ताओं के लिए मांगा राहत कोष

E20 Petrol:

E20 Petrol: कर्नाटक में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के नाम पर E30 तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचा जा रहा है। सरकार के मुताबिक, इससे वाहनों के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही उपभोक्ताओं को माइलेज में कमी और वाहन मरम्मत के रूप में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस मामले में कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पेट्रोल के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की। राज्य सरकार ने केंद्र से तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए राहत कोष बनाने की मांग की है।

E20 Petrol: 63 पेट्रोल नमूनों की जांच में 30 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल मिलने का दावा

मंत्री रिजवान अरशद के अनुसार, कर्नाटक सरकार ने राज्य के अलग-अलग जिलों से पेट्रोल के कुल 63 नमूने एकत्र किए थे। इनकी जांच में कई तेल कंपनियों के पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई।

सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक:

– IOCL के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत एथेनॉल मिला।
– HPCL के नमूने में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल दर्ज किया गया।
– BPCL के पेट्रोल में 26.5 प्रतिशत एथेनॉल पाया गया।
– Nayara के नमूने में 26.1 प्रतिशत एथेनॉल मिला।
– Shell के नमूने में 25.5 प्रतिशत एथेनॉल दर्ज किया गया।

मंत्री का कहना है कि बेंगलुरु समेत राज्य के कई जिलों में पेट्रोल के नमूनों में एथेनॉल का स्तर निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से ऊपर मिला है।

E20 Petrol: तेल कंपनियों की जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल

रिजवान अरशद ने पेट्रोल की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में पेट्रोल के नमूनों को तेल कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं में भेजा गया था, लेकिन वहां से मिली रिपोर्ट में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बाद उन्हीं नमूनों को NABL और ISO से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया। मंत्री के मुताबिक, इन प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिश्रण की पुष्टि हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एथेनॉल की मात्रा जांच का एक महत्वपूर्ण पैमाना है तो तेल कंपनियों की रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

क्या E20 से ज्यादा एथेनॉल भारतीय वाहनों के लिए नुकसानदायक?

कर्नाटक सरकार ने ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल से वाहनों को होने वाले संभावित नुकसान पर भी चिंता जताई है। मंत्री ने दावा किया कि देश में चल रहे 35 करोड़ से ज्यादा वाहनों में से लगभग 99 प्रतिशत वाहन 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। उनके मुताबिक, निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने पर वाहनों के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर असर पड़ सकता है। इनमें रबर पार्ट्स, होज पाइप, गैस्केट, सील और O-रिंग शामिल हैं। ऐसे हिस्सों के समय से पहले खराब होने से वाहन मालिकों को मरम्मत और पार्ट्स बदलने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

माइलेज घटने से 1 लाख करोड़ रुपये तक नुकसान का दावा

कर्नाटक सरकार ने ज्यादा एथेनॉल मिश्रण के कारण वाहनों के माइलेज में कमी आने का भी दावा किया है। रिजवान अरशद के अनुसार, अगर औसतन 10 प्रतिशत माइलेज कम होता है तो उपभोक्ताओं को सालाना करीब 62 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।वहीं, वाहन मरम्मत और खराब हुए पार्ट्स को बदलने का खर्च भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल आर्थिक नुकसान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

केंद्र सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें

इस विवाद को लेकर कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं।

1. तेल कंपनियों पर कार्रवाई: 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

2. E20 स्पॉइलेज फंड: वाहनों को संभावित नुकसान होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा देने के लिए विशेष राहत कोष बनाया जाए।

3. पेट्रोल पंपों पर जानकारी अनिवार्य: देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।

4. केंद्र सरकार स्थिति स्पष्ट करे: उपभोक्ताओं को वास्तव में कितने प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल दिया जा रहा है, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

E20 पेट्रोल पर केंद्र सरकार पहले भी दे चुकी है जवाब

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पहले भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। केंद्र का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी E20 पेट्रोल के खिलाफ उठ रही आपत्तियों को पहले ‘पेड कैंपेन’ बता चुके हैं। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वाहनों के खराब होने से जुड़ी रिपोर्टों को भ्रामक बताया था। अब कर्नाटक सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट केंद्र को भेजने और राज्य में पेट्रोल की नियमित जांच जारी रखने की बात कही है। ऐसे में E20 पेट्रोल की गुणवत्ता, वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं के संभावित नुकसान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बहस तेज होने के आसार हैं।

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