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मेरठ से बड़ी खबर, 25 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जाएंगे? SIR में सामने आई ये बात

Meerut News

Meerut News: मेरठ मंडल में SIR के फॉर्म अपडेट और जमा न करने वाले करीब 25 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से करने की संभावना है। 26 दिसंबर तक लोग एसआईआर फॉर्म जमा कर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने मेरठ मंडल में मतदाता सूची की वास्तविकता को उजागर कर दिया है। मंडल के छह जिलों में करीब 25 लाख मतदाताओं के नाम हटने की संभावना बन गई है, क्योंकि इनसे संबंधित गणना फॉर्म अब तक जमा नहीं हो सके। आयोग ऐसे मतदाताओं को शिफ्टेड, मृतक, अनुपस्थित या डुप्लीकेट श्रेणी में रखकर सूची से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

मतदाताओं को दिया गया एक और मौका 

हालांकि, राहत की बात यह है कि निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण अवधि को 26 दिसंबर तक बढ़ाकर ऐसे सभी मतदाताओं को एक और मौका दे दिया है। अब यदि कोई मतदाता अपने दस्तावेज और गणना फार्म समय पर जमा कर देता है, तो उसके नाम पर दोबारा विचार किया जाएगा। आधिकारिक रिकार्ड के मुताबिक, मेरठ मंडल में बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की संख्या है, जिनसे बीएलओ गणना पत्र एकत्र नहीं कर सके हैं। इसी आधार पर उन्हें संदिग्ध सूची में डाला गया है। सबसे अधिक प्रभावित जिला गाजियाबाद है, जहां करीब 9 लाख मतदाताओं को मृतक, अनुपस्थित या शिफ्टेड माना गया है।  इसके बाद मेरठ जिला है, जहां 6.30 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटने की स्थिति बन रही है। इसी तरह अन्य जिलों का हाल भी चिंताजनक है। बागपत में करीब 1.5 लाख, हापुड़ में लगभग 2.5 लाख, बुलंदशहर में करीब 3.5 लाख, गौतमबुद्धनगर में लगभग 3 लाख, इन सभी जिलों को मिलाकर यह संख्या लगभग 25 लाख तक पहुंच रही है, जो अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है।

Meerut News: प्रक्रिया रोककर जांच की जाएगी

चुनाव अधिकारियों के अनुसार, कई मतदाता अपने पुराने पते से शिफ्ट हो गए हैं। कुछ के निधन की सूचना परिवार ने नहीं दी, जबकि कई मामलों में डुप्लीकेट प्रविष्टियां पाई गई हैं। बीएलओ द्वारा लगातार सत्यापन कार्य चल रहा है और इन सभी डेटा को आधार बनाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जा रही है। अधिकारियों ने साफ किया है कि अब अगले 15 दिनों का समय निर्णायक होगा। यदि संदिग्ध सूची में शामिल कोई भी मतदाता अपना गणना फॉर्म जमा कर देता है या आवश्यक दस्तावेज दे देता है, तो उसके नाम को हटाने की प्रक्रिया रोककर पुनः जांच की जाएगी।

विशेष पुनरीक्षण के इस चरण को चुनाव आयोग ने बेहद महत्वपूर्ण माना है, ताकि आगामी चुनावों में मतदाता सूची अधिक सटीक और त्रुटिरहित हो सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस बढ़े हुए अवसर का लाभ उठाते हुए समय पर अपनी जानकारी अपडेट करवाएं, ताकि उनका नाम सूची से न कटे और मतदान का मौलिक अधिकार सुरक्षित रहे।

Report By: यश मित्तल 

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