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मनरेगा की संसद के रास्ते विदाई: कांग्रेस नाराज

MGNREGA

MGNREGA: केंद्र सरकार ने लोकसभा में मंगलवार को विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण बिल 2025 पेश किया। संक्षिप्त रूप में इसका नाम है-जीरामजी होगा। इस बिल पर चर्चा संसद में हो रही है। यही बिल कानून का रूप ले लेगा।

इस बिल का पिछला नाम मनरेगा था। 2000 में कांग्रेस ने महात्मा गांधी रेाजगार गारंटी के नाम से देश में इसको कानूनी रूप दिया। इसके माध्यम से ग्रामीण भारत के हर परिवार को साल भर में 100दिन का रोजगार देने का वायदा था। यह योजना 20 वर्षों से यह चल रही है।लोकसभा में कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे 20 वर्ष पुराने मनरेगा कानून का आधुनिक विकल्प और ग्रामीण विकास के लिए संरचनात्क सुधार बताया। वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसे महात्मा गांधी का नाम हटाने, राज्यों पर बोझ बढ़ाने व रोजगार गारंटी को कमजोर करने की कोशिश बताया। इसके पीछे तर्क था कि इतना बड़ा बदलाव गहन जांच व व्यापक सहमति के नहीं होना चाहिए।

मंत्री शिवराज सिंह चौहान जीरामजी पर सफाई देते हुए कह रहे थे कि बापू हमारे दिल में है। सरकार उनके सिद्धांतों पर विश्वास करती है और इसे जमीन पर भी उतारती भी है। नई व्यवस्था में हर ग्रामीण परिवार को साल भर में 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। यह 100 दिन से ज्यादा का है। साथ ही इस विधेयक की तारीफ मे कहते हैं कि यह कानून रोजगार के साथ ही विकसित भारत 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रख कर किया गया है। इसमें टिकाउू ग्रामीण परिकल्पना को वास्तविक रूप में जमीन पर उतारेगा। पानी से जुड़े कार्य, गावों की आधारभूत संरचना, रोजगार आधारित ढ़ाचा और बाढ़ और सूखे की मार से निपटना इसकी पहली गारंटी है। आगे मंत्रीजी कहते हैं कि विपक्ष को राम का नाम जोड़ने से क्यों दिक्कत है। बापूजी भी रामराज्य के समर्थक थे।

दूसरी ओर विपक्ष का कहना था कि पिछले मनरेगा बिल में मजदूरों को कानूनी अधिकार था रोजगार का। अब ग्राम पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी। पहले 90 फीसदी राशि की व्यवस्था थी, अब उसको घटाकर 60 फीसदी पर ही सीमित कर दिया है। शेष 40 फीसदी की राशि को स्वयं राज्यों को जुटानी होगी। देश में यह बिल किस तरह से विकसित भारत का निर्माण करेगा? इसका कोई खाका नहीं है। पहली वाली गांरटी देश में महंगाई को देखते हुए कम थी। अब यदि केंद्र की वर्तमान सरकार वास्तव में ग्रामीणों का जीवन सुधारने की गारंटी देना चाहती हैं, तो ऐसी योजनाओं को लागू करें जिससे उनका पेट भी भरे और जीवन स्तर भी सुधरे। तभी विकसित भारत का सपना पूरा होगा, नही ंतो अभी गरीबी अपनी जगह पर है।

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