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उदासीन पर्यावरण विभाग, 50 फीसदी नौकरियां देश में खाली हैं

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NCR News: संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने जानकारी दी कि देश में 50 फीसदी स्वीकृत पद खाली हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि पद सृजित तो कर दिए गये हैं, पर किसी को काम नहीं दिया गया। यह भी पता चला कि दिल्ली और नोएडा सबसे नीचे के पायदान पर हैं स्वीकृत फंड का उपयोग करने में पर्यावरण संरक्षण के लिए।

हवा को स्वच्छ रखने के लिए सरकार ने जो कुछ भी कोशिश की, देश की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के लिए, वह कामयाब नहीं दिख रही है। अब आसपास के क्षेत्रों में नजर डालें, तो हर जगह गंदगी के ढ़ेर दिखते हैं। दिल्ली महानगर में न तो सड़कें साफ हैं और न कूड़े के ढ़ेर उठाये जा रहे हैं। केंद्रीय कंट्रोल बोर्ड के अलावा, 28 राज्य कंट्रोल बोर्ड होने के बावजूद, स्वच्छ हवा आम नागरिक को नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही 8 पर्यावरण समितियां हैं।

नेशनल हाई वे को छोड़ कर नगर के भीतर यदि आप सर्वे करेंगे, तो पायेंगे कि हर जगह गली-मोहल्ले की सड़कें खुदी हैं; गंदां पानी बह रहा है, लेकिन सफाई कर्मचरी जब नहीं होंगे, पद खाली पड़े हैं, तब किससे गुहार करें कि इन सड़कों को साफ रखें।

अक्सर होता यह है कि एक विभाग आयेगा, वह सीवर की लाइन खोदेगा, अपना काम करके छोड़ देगा। बहुत समय तक सड़कें वैसी ही खुदी रहेंगी। दूसरे विभाग का काम होगा तो वह भी अपना काम करके चला जायेगा। और सड़क की हालत को और खराब करके चला जायेगा। उनकी मरम्मत करने का कब समय आयेगा ? इस तरह से बेचारी गली व सड़क जस की तस ठीक करने के लिए छोड़ दी जाती हैं।

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