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लोकसभा में ग्रामीण रोजगार बिल पर घमासान, विपक्ष हमलावर

लोकसभा में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी दलों ने सरकार पर हिंदी थोपने, मनरेगा को समाप्त करने और ग्रामीण गरीबों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

PARLIAMENT NEWS: लोकसभा में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी दलों ने सरकार पर हिंदी थोपने, मनरेगा को समाप्त करने और ग्रामीण गरीबों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

मनरेगा की जगह नया ढांचा, 125 दिन रोजगार का वादा

यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 की जगह लाया गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा, जो मौजूदा 100 दिनों की सीमा से अधिक है।

PARLIAMENT NEWS: शिवराज सिंह चौहान ने किया बिल का बचाव

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 दिसंबर को हंगामे के बीच इस बिल को सदन में पेश किया। उन्होंने कहा कि यह विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप है और इसका उद्देश्य जल सुरक्षा, ग्रामीण कनेक्टिविटी, जलवायु लचीलेपन और डिजिटल निगरानी को मजबूत करना है।

PARLIAMENT NEWS: गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपी जा रही

डीएमके सांसद के. कनिमोझी ने बिल के नाम पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने का प्रयास है और केंद्र सरकार बार-बार क्षेत्रीय भाषाओं व संस्कृतियों को नजरअंदाज कर रही है।

महुआ मोइत्रा ने लगाया सांप्रदायिकरण का आरोप

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने योजना का नाम बदलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवान राम का नाम जोड़कर योजना को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह किसी धर्म के लिए नहीं बल्कि गरीबों के लिए होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के लंबित मनरेगा फंड जारी करने की मांग भी की।

 नाम हटाने पर विपक्ष नाराज,सहयोगी दलों ने किया विधेयक का समर्थन

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाने को राष्ट्रपिता का अपमान बताया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। टीडीपी सांसद लावू कृष्ण देवरायालू ने बिल का समर्थन करते हुए इसे जवाहर रोजगार योजना जैसी पुरानी योजनाओं का नया रूप बताया। उन्होंने 125 दिन के रोजगार प्रावधान को ग्रामीणों के लिए फायदेमंद बताया।

सरकार बनाम विपक्ष, टकराव जारी

बिल में केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के फंडिंग अनुपात का प्रावधान है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 होगा। इसके अलावा खेती के चरम मौसम में काम की अस्थायी रोक और सामान्य आवंटन जैसे बदलाव भी शामिल हैं। सरकार जहां इस बिल को ग्रामीण आजीविका के आधुनिकीकरण की दिशा में जरूरी सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष को आशंका है कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होगी और राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। विधेयक को लेकर संसद में सियासी घमासान जारी रहने के आसार हैं।

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