Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सर्द रातें और गन्ना भवन के बाहर जलते अलाव यह दृश्य है मेरठ के उस आंदोलन का जहाँ किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। पिछले चार दिनों से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले सैकड़ों किसान सिस्टम की मनमानी के खिलाफ मोर्चों पर डटे हैं। दिन में जहाँ गन्ने की होली जलाकर गुस्सा जाहिर किया जा रहा है वहीं रात के सन्नाटे में गीत-संगीत के जरिए इस व्यवस्था पर तंज कसा जा रहा है।
तालाबंदी और तंज जब दफ्तर बना रैन बसेरा
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने गन्ना भवन के सभी कार्यालयों पर ताला जड़ दिया है। जिला गन्ना अधिकारी (DCO) के दफ्तर के बाहर बिछे गद्दे इस बात का गवाह हैं कि किसान अब आश्वासन नहीं समाधान चाहते हैं। रात के वक्त जब पारा गिरता है तो अपनी तो जैसे तैसे कट जाएगी जैसे गीतों पर थिरकते किसान प्रशासन को यह संदेश दे रहे हैं कि उनकी इच्छाशक्ति को ठंड से नहीं तोड़ा जा सकता।
Meerut News: आंदोलन की जड़ इंडेंट का खेल और रिजेक्शन की मार
किसानों के गुस्से के केंद्र में मोहिउद्दीनपुर और मवाना शुगर मिलों की कार्यप्रणाली है। किसानों के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं…
तौल में विसंगति18 क्विंटल के इंडेंट पर 24 क्विंटल की ट्रॉली को वापस करना या अगले इंडेंट में कटौती करना।
किस्मों का विवाद जो गन्ने की किस्में मिलों ने खुद वितरित की थीं अब उन्हें ही रिजेक्ट कर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
भ्रष्टाचार अफसरों और मिल प्रबंधन पर मिलीभगत और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप।
वार्ता विफल आश्वासन से नहीं जमी बात
बुधवार को प्रशासनिक अमला हरकत में आया। एडीएम सिटी बृजेश कुमार उप गन्ना आयुक्त राजीव राय और मिलों के महाप्रबंधकों ने कई दौर की वार्ता की। देर रात तक चली इन बैठकों और जिलाधिकारी वीके सिंह के फोन पर दिए गए आश्वासनों के बावजूद गतिरोध बरकरार रहा। किसानों का दो टूक कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई और लिखित समाधान नहीं मिलता वे पीछे नहीं हटेंगे। भीषण ठंड के कारण कई किसानों का स्वास्थ्य भी बिगड़ा है लेकिन हर्ष चहल बिट्टू और सत्यवीर जैसे युवाओं से लेकर बुजुर्ग किसानों तक का जोश बरकरार है। मेरठ का गन्ना भवन फिलहाल एक ऐसे अखाड़े में तब्दील हो चुका है जहाँ किसान अपने हक की मिठास वापस पाने के लिए कड़वी ठंड से लड़ रहे हैं।
Report By: यश मित्तल
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