Muzaffarnagar News: आमतौर पर पुलिस के सत्यापन अभियान को सुरक्षा की औपचारिक प्रक्रिया माना जाता है लेकिन कभी-कभी यही अभियान किसी की जिंदगी बदल देता है। ऐसा ही दिल को छू लेने वाला मामला मुजफ्फरनगर जिले से सामने आया है, जहाँ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सत्यापन अभियान ने चार साल से लापता युवक को उसके परिवार से मिला दिया।
अब पढ़े क्या है मामला…
यह भावनात्मक घटना जनपद के तितावी थाना क्षेत्र की है। 15 दिसंबर की रात पुलिस टीम शामली-मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे पर स्थित भगतजी ढाबा पर पहुंची थी। टीम ढाबे पर कार्यरत कर्मचारियों का सत्यापन कर रही थी ताकि रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ की जांच सुनिश्चित की जा सके। इसी दौरान पुलिस की नजर एक ऐसे युवक पर पड़ी जो न तो ठीक से संवाद कर पा रहा था और न ही अपना पूरा परिचय बता पा रहा था। पुलिस को शक हुआ कि युवक संभवतः मानसिक रूप से अस्वस्थ है। गहन पूछताछ के बाद युवक ने अपना नाम शैलेंद्र उर्फ शंकर बताया और कहा कि वह जनपद मैनपुरी के ग्राम बृजपुर का रहने वाला है। यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरन्त बिछुआ थाना (मैनपुरी) से संपर्क साधा। जांच में यह खुलासा हुआ कि शैलेंद्र चार वर्ष पूर्व अपने घर से लापता हो गया था जिसकी गुमशुदगी रिपोर्ट बिछुआ थाने में दर्ज थी।
Muzaffarnagar News: खुशी से आंखें हो गई नम
इस तथ्य के सामने आने के बाद तितावी पुलिस टीम भी भावनात्मक हो उठी। उन्होंने महसूस किया कि वर्षों से भटक रहा यह युवक अब तक अपने परिवार से बिछड़ा हुआ था। तितावी थाना पुलिस ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तुरंत मैनपुरी में शैलेंद्र के परिजनों से संपर्क किया। जैसे ही परिवार को बेटे के मिलने की सूचना मिली खुशी से उनकी आंखें नम हो गईं। अगले ही दिन परिवारजन मुजफ्फरनगर पहुंचे जहाँ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से शैलेंद्र को उनके सुपुर्द कर दिया गया। वर्षों बाद अपने बेटे को देखकर परिवार के चेहरे पर राहत और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वह पल ना केवल परिवार के लिए बल्कि पुलिस टीम के लिए भी अत्यंत भावुक था।
सीओ ने मामले में कही बड़ी बात
फुगाना के क्षेत्राधिकारी (सीओ) नीरज सिंह ने बताया कि इस सफलता के पीछे तितावी थाना पुलिस की सतर्कता और संवेदनशीलता है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले में रोजगार और आवासीय स्थानों के सत्यापन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इस मामले में एसआई नवनीत कुमार की भूमिका विशेष रही जो स्वयं मैनपुरी जिले के निवासी हैं। उन्होंने सी-प्लान पोर्टल के माध्यम से स्थानीय प्रधान से संपर्क किया और फिर परिवार तक सूचना पहुँचाई। उनकी व्यक्तिगत पहल से ही युवक अपने घर लौट सका।
सीओ नीरज सिंह ने कहा हमारे लिए यह सिर्फ एक जांच अभियान नहीं.बल्कि इंसानियत की जीत का उदाहरण है। जब चार साल बाद परिवार को उनका बेटा मिला.तो पुलिस टीम के हर सदस्य की आंखें भी नम हो गईं। मुजफ्फरनगर पुलिस का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा अभियान केवल कानून व्यवस्था का हिस्सा नहीं होते बल्कि समाज में विश्वास और मानवीय भावनाओं को जीवित रखने की मिसाल भी पेश करते हैं।
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