Lakhimpur Kheri: भारत और नेपाल की मित्रवत सीमाओं के बीच का सबसे महत्वपूर्ण द्वार कहा जाने वाला ‘गौरीफंटा बॉर्डर’ सोमवार को एक अघोषित रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (SSB) की अतिरिक्त सख्ती आज आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गई। सुरक्षा जांच के नाम पर अपनाई गई कड़ाई और सुरक्षाकर्मियों के कथित अडियल रवैये के कारण पूरी सीमा पर अराजकता का माहौल पैदा हो गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही बॉर्डर पर वाहनों की कतार लगनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते कई किलोमीटर पीछे दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों तक जा पहुँची। इस भीषण जाम में केवल मालवाहक ट्रक ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मरीज भी फंसे रहे।
भड़का जन-आक्रोश
इस हंगामे की मुख्य वजह केवल जाम नहीं, बल्कि सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार रही। मौके पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चेकिंग के दौरान एसएसबी के कुछ जवानों ने मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। यात्रियों के साथ की जा रही पूछताछ में शालीनता का अभाव दिखा, जिससे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब कुछ यात्रियों ने देर होने की बात कही, तो उन्हें कथित तौर पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि लोगों ने वाहनों से उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सीमा पर “व्यवस्था सुधारो” और “शालीन व्यवहार करो” के नारे गूँजने लगे। हंगामा इतना बढ़ गया कि अंतरराष्ट्रीय आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
Lakhimpur Kheri: कोतवाल ने संभाला मोर्चा
बॉर्डर पर हालात बिगड़ते देख और हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया। गौरीफंटा कोतवाल दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। उस समय स्थिति काफी संवेदनशील थी; एक तरफ आक्रोशित भीड़ थी और दूसरी तरफ अपने नियमों पर अड़े सुरक्षाकर्मी। कोतवाल गौरीफंटा ने बीच-बचाव करते हुए मोर्चा संभाला। उन्होंने एसएसबी के उच्च अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के बीच मध्यस्थता की। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन इसके नाम पर आम नागरिकों का उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है। पुलिस की सूझबूझ और काफी मशक्कत के बाद, एसएसबी ने जांच की प्रक्रिया में थोड़ी नरमी बरती और जाम खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। लगभग 5-6 घंटों की कड़ी जद्दोजहद के बाद पहिये दोबारा घूमे और यात्रियों को राहत मिली।
व्यापार पर पड़ता बुरा असर
लखीमपुर खीरी का यह बॉर्डर न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुधवा टाइगर रिजर्व के पास होने के कारण यहाँ विदेशी पर्यटकों का भी आना-जाना लगा रहता है। जानकारों का कहना है कि यदि सीमा पर इसी तरह का व्यवहार जारी रहा, तो इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के पर्यटन और भारत की वैश्विक छवि पर पड़ेगा।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि “हम सुरक्षा एजेंसियों का सम्मान करते हैं, लेकिन जांच के नाम पर घंटों खड़ा रखना और फिर बदतमीजी करना किसी भी तरह से उचित नहीं है। प्रशासन को इसका स्थायी समाधान निकालना चाहिए।”
संजय कुमार राठौर की इस रिपोर्ट के माध्यम से स्थानीय जनता ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की जो कुछ इस प्रकार है…
- व्यवहार कुशलता: सीमा पर तैनात जवानों को आम जनता और पर्यटकों के साथ पेश आने के लिए विशेष ‘सॉफ्ट स्किल’ ट्रेनिंग दी जाए।
- आधुनिक जांच प्रणाली: मैनुअल चेकिंग के बजाय स्कैनर और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग बढ़े ताकि समय की बचत हो।
- अतिरिक्त फोर्स: भीड़भाड़ वाले दिनों में चेकिंग काउंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए ताकि किलोमीटरों लंबा जाम न लगे।
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