Bangladesh Violence: भारत को कम व लंबी अवधि वाले युद्ध लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए! ये शब्द हैं भारत के सीडीएस के। आतंकवाद रोकने के लिए आपरेशन सिंदूर-जैसे कम अवधि एवं उच्च तीब्रता वाले संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। आज की इन नाजुक परिस्थिति में देश को युद्ध के लिए तैयार रहने की जरूरत है; यह संकेत कोई छोटा व्यक्ति नहीं , बल्कि देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार, तीनों सेनाओं का कमांडर सचेत कर रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान का अभी भी लड़ाई से मन नहीं भरा। परोक्ष रूप से आतंकवाद को लगातर विभिन्न स्वरूपों में ला रहा है।
बांग्ला देश की शांति को भंग करने में पाकिस्तान को मजा आ रहा है। इसी प्रसंग पर गौर करें, तो बांग्लादेश में हो रहा विद्रोह पूरी तौर से मुस्लिम चरम पंथियों के हाथ में खेल रहा है। पाकिस्तान के भीतर जो अव्यवस्था चल रही है, वह भी बांग्लादेश की जैसी है। जैसे अच्छे-खासे चुने हुए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाकर, जेल में डाला गया; उस पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाये गये। जेल की 14 और पत्नी बुशरा बीबी को 7 वर्ष की सजा सुनाई गई। इमरान खान पर 10 लाख और पत्नी पर 5 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। सत्ता हथियाने का यह तरीका हमारे दोनों पड़ोसियों ने कर रखा है। बांग्ला देश बनने के बाद हमारा पूर्वी हिस्सा अब तक फौज के बल पर नहीं चल रहा था, वहां लोकतंत्रीय व्यवस्था के साथ देश चल रहा था। लेकिन पाकिस्तान ने हमारे पूर्व से भी फ्रंट खोल दिया है। वह अपने परोक्ष और आतंकी रूप को बांग्लादेश में बिठा चुका है। आईएसआई ने हमेशा पाकिस्तान में सेना के हाथों से ही प्रशासन चलाया है। लोकतंत्रीय तरीके से इमरान ने पद संभाला पर यह बात आगे नहीं बढ़ पाई। वर्तमान पाकिस्तान के प्रशासक प्रधानमंत्री अपने बूते पर सत्ता में नहीं हैं। वह सेना प्रमुख के हाथों की कठपुतली बने हैं।
इन परिस्थितियों का जायजा लेकर ही हमारे सीडीएस जनरल अनिल चौधरी का वक्तव्य काफी मायने रखता है। हमें सर्तक रहना होगा, अभी भारत की सेना को अच्छी तरह से पता है कि इस वक्त पश्चिम-पूर्व के दो बाजू झुलसाने का काम कर रहे हैं।
अभी तो वे वहां से अल्पसंख्यक हिुदुओं को देश से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें भारत में शरणार्थियों की तरह भेजने का माहौल बना रहे हैं। सोचने की बात है अपने पुस्तैनी घरबार को छोड़कर उन्हें मार भी रहे हैं और भारत भेजने की चेष्ठा भी कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में कूटनीति भी काम नहीं करेगी।
बांग्लादेश से शरणार्थियों का आना कोई नई बात नहीं है, मुख्य रूप से रोहिंग्या शरणार्थी म्यामार से बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं और धार्मिक रूप उत्पीड़न के कारण भारत आने वाले हिंदू शरणार्थी शामिल हैं। हाल ही में 2024-25 में कुछ रोहिंग्याओ का इंडोनेशिया जाना और भारत में सीएए के तहत हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता मिलना हुआ है। इस वर्ष भारत में बांग्लादेश से 12 हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिली। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान लगभग एक करोड़ शरणार्थी भारत आये थे।
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