Bihar news: बिहार की सत्ता के गलियारों में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी तेज है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कृषि मंत्री रामकृपाल यादव के एक बयान ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है। उन्होंने दावा किया है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और तेजस्वी यादव की पार्टी अब पतन की ओर बढ़ रही है।
“आरजेडी खत्म होने के कगार पर” : रामकृपाल यादव
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आरजेडी की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है। उनके मुताबिक, पार्टी के सभी 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और किसी भी वक्त भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बीजेपी जदयू के बिना सरकार बनाने का विकल्प तलाश रही है। अगर गणित देखा जाए तो बीजेपी के 89 विधायक, लोजपा (आर) के 19 और कथित तौर पर आरजेडी के 25 विधायक कुल संख्या 133 हो जाती है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है।
Bihar news: जदयू का पलटवार: “18 आरजेडी विधायक हमारे संपर्क में”
दूसरी ओर, जनता दल (यूनाइटेड) ने भी पलटवार किया है। पार्टी के वरीय प्रवक्ता नीरज कुमार का दावा है कि आरजेडी के 18 विधायक जदयू के संपर्क में हैं। इसके बाद सवाल उठा कि क्या जदयू, बीजेपी को दरकिनार कर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। नीरज कुमार के अनुसार, जदयू के 85 और आरजेडी के 18 विधायक मिलकर कुल 103 विधायक होते हैं। बहुमत के लिए 123 की जरूरत है। अगर इसमें लोजपा (आर) के 19 और AIMIM के 5 विधायक जुड़ जाएं, तो आंकड़ा 126 तक पहुंच सकता है।
Bihar news: सत्ता का दूसरा गणित भी तैयार
जदयू की ओर से एक दूसरा फॉर्म्युला भी सामने रखा गया। अगर जदयू के 85 और आरजेडी के 18 विधायकों के साथ AIMIM (5), कांग्रेस (6), रालोमो (4), बसपा (1), IIP (1), वाम दल (3) और HAM (5) साथ आ जाएं, तो कुल संख्या 125 तक पहुंच सकती है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
क्या यह सिर्फ राजनीतिक स्टंट है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन दावों में कितना दम है। रामकृपाल यादव का कहना है कि आरजेडी के 25 विधायक संपर्क में हैं, लेकिन इन 25 में एक विधायक खुद तेजस्वी यादव भी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी यादव के बीजेपी में जाने की कोई वास्तविक संभावना है? आरजेडी में भाई बीरेंद्र, आलोक मेहता, रामानंद यादव, करिश्मा राय, कुमार सर्वजीत, रणविजय साहू और प्रो. चंद्रशेखर जैसे मजबूत और प्रभावशाली नेता हैं, जिनकी पार्टी से बांडिंग फिलहाल मजबूत मानी जाती है।
अल्पमत सरकार का जोखिम क्यों लेगा कोई?
Bihar news: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात में 202 विधायकों की स्थिर सरकार को छोड़कर 125 या 130 विधायकों वाली सरकार बनाना जोखिम भरा कदम होगा। ऐसी सरकार पर हर वक्त बहुमत का खतरा मंडराता रहेगा। साथ ही, सहयोगी दलों की बढ़ती मांगें और अस्थिरता का संकट भी बना रहेगा। सबसे अहम सवाल यह भी है कि केंद्र और राज्य में जिस तरह की राजनीतिक बॉन्डिंग फिलहाल मौजूद है, उसे तोड़कर कोई दल अल्पमत सरकार बनाने का जोखिम क्यों उठाएगा? फिलहाल, बिहार की राजनीति में ये बयानबाज़ी हकीकत से ज्यादा सियासी दबाव बनाने की रणनीति नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ राजनीतिक स्टंट है या सत्ता परिवर्तन की कोई ठोस पटकथा।
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