Shamli News: शामली जनपद में कड़ाके की ठंड और जानलेवा शीत लहर के बीच एक तरफ प्रशासन बच्चों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ निजी स्कूल संचालकों की मनमानी मासूमों की सेहत पर भारी पड़ रही है।जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद थाना बाबरी क्षेत्र के गाँव केडी में स्कूलों का खुला रहना न केवल अनुशासनहीनता है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को सीधी चुनौती है।
कड़ाके की ठंड में ठिठुरते मिले मासूम
विदित हो कि भीषण ठंड के मद्देनजर जिलाधिकारी शामली ने 29 और 30 दिसंबर को कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य अवकाश घोषित किया था। लेकिन गाँव केडी की तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली रहीं। यहाँ आधा दर्जन से ज्यादा स्कूल खुले पाए गए। आलम यह था कि छोटे-छोटे बच्चे हाड़ कंपा देने वाली ठंड में स्कूल पहुँचने को मजबूर थे।

Shamli News: निर्माणाधीन बिल्डिंग में चल रही थी क्लास
लापरवाही की इंतहा तब देखने को मिली जब एक निर्माणाधीन (अधबनी) बिल्डिंग में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। जहाँ न खिड़कियाँ थीं और न ही ठंड से बचने के पर्याप्त इंतजाम। इन स्कूलों ने न तो अभिभावकों को छुट्टी की सूचना दी और न ही सरकारी आदेश का पालन करना जरूरी समझा। वहीं जब मीडिया कर्मियों और स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुँचकर स्कूल प्रशासन से सवाल पूछे तो स्थिति और भी संदिग्ध हो गई। डीएम के आदेश का उल्लंघन करने वाले शिक्षक और स्टाफ कैमरे को देख खेतों और गलियों की तरफ भागते नजर आए। यह भगदड़ साफ बयां कर रही थी कि स्कूल संचालकों को अपनी गलती का अहसास तो था लेकिन वे नियमों से ऊपर अपनी मनमानी चला रहे थे।

अभिभावकों को कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूलों ने जानबूझकर छुट्टी की जानकारी छिपाई। अब सवाल यह उठता है कि क्या इन स्कूल संचालकों पर एफआईआर (FIR) दर्ज होगी? क्या जिला शिक्षा विभाग इन स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसा कड़ा कदम उठाएगा? फिलहाल, यह मामला पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बेखौफ स्कूल संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में बच्चों की जान से ऐसा खिलवाड़ न हो सके।
ये भी पढ़े… जेल में ही रहेंगे कुलदीप सेंगर, SC से बड़ा झटका, अलका लांबा ने कह दी बड़ी बात…






