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प्राइवेट जेट में सफर? ये है इंश्योरेंस का असली सच!

क्या प्राइवेट प्लेन में सफर करने वालों का भी होता है इंश्योरेंस? जानिए पूरा सच
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Plane Crash: हाल के दिनों में विमान से जुड़े हादसों और चर्चाओं के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या प्राइवेट प्लेन में यात्रा करने वालों को भी इंश्योरेंस कवर मिलता है। यह सवाल उस वक्त और गहरा हो गया, जब महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम Ajit Pawar से जुड़ी प्राइवेट प्लेन दुर्घटना की खबर सामने आई। ऐसे हादसों के बाद आम लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है कि प्राइवेट जेट में सफर करने वालों को आखिर कितनी सुरक्षा मिलती है, कितना मुआवजा तय होता है और क्लेम की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है। आइए पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

Plane Crash: प्राइवेट प्लेन यात्रियों का इंश्योरेंस

प्राइवेट विमान में सफर करने वालों के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था होती है, लेकिन यह रेगुलर कमर्शियल फ्लाइट्स से अलग होती है। आम एयरलाइंस में यात्रियों का बीमा एयर कैरियर की स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत अपने-आप शामिल होता है, जबकि प्राइवेट जेट के मामले में यह जिम्मेदारी विमान के मालिक या उसे चार्टर पर उड़ाने वाली कंपनी की होती है। वही लोग इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं, जिसमें आमतौर पर विमान, पायलट, क्रू मेंबर्स और यात्रियों को कवर किया जाता है। हालांकि यह कवरेज पूरी तरह पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है।

Plane Crash: किन बातों पर निर्भर करता है कवर?

प्राइवेट प्लेन में यात्रियों को मिलने वाला इंश्योरेंस किसी एक तय नियम में बंधा नहीं होता। यह पॉलिसी की लिमिट, दुर्घटना के कारण और बीमा अनुबंध में शामिल शर्तों व क्लॉज पर निर्भर करता है। अधिकतर मामलों में पॉलिसी में मृत्यु होने पर मुआवजा, स्थायी विकलांगता की स्थिति में भुगतान और इलाज से जुड़े खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर पॉलिसी में ये सभी कवर मौजूद हों। कई बार यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए अलग से ट्रैवल इंश्योरेंस भी कराना पड़ता है।

कितनी रकम मिल सकती है?

प्राइवेट फ्लाइट हादसे में मिलने वाली रकम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होती है। सच्चाई यह है कि यह राशि पूरी तरह पॉलिसी अमाउंट पर निर्भर करती है। सामान्य मामलों में यह कवर लाखों रुपये तक सीमित हो सकता है, लेकिन अगर पॉलिसी हाई-वैल्यू या किसी खास व्यक्ति के लिए तैयार की गई हो, तो मृत्यु की स्थिति में मिलने वाला मुआवजा कई करोड़ रुपये तक भी हो सकता है। खासतौर पर वीआईपी या हाई-प्रोफाइल यात्रियों के लिए पॉलिसी की राशि काफी ज्यादा तय की जाती है।

Plane Crash: क्लेम की प्रक्रिया कैसे होती है?

हादसे के बाद इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया एक तय कानूनी ढांचे के तहत चलती है। सबसे पहले दुर्घटना से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्ट और जांच पूरी होती है। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी को एफआईआर, मेडिकल रिपोर्ट, पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज और नॉमिनी या लाभार्थी की जानकारी दी जाती है। कंपनी अपने स्तर पर सभी तथ्यों की जांच करती है और अगर सब कुछ पॉलिसी की शर्तों के अनुसार सही पाया जाता है, तो तय राशि का भुगतान कर दिया जाता है।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार से जुड़ी प्राइवेट प्लेन दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राइवेट जेट में सफर कितना सुरक्षित है और उसमें बीमा की भूमिका कितनी अहम है। प्राइवेट प्लेन में सफर भले ही खास और एक्सक्लूसिव माना जाता हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इंश्योरेंस का सुरक्षा कवच मौजूद होता है, लेकिन वह कितना होगा, कैसे मिलेगा और किन शर्तों पर मिलेगा, यह सब पॉलिसी तय करती है। इसलिए प्राइवेट जेट से यात्रा करने से पहले बीमा शर्तों को समझना और जरूरत पड़ने पर अलग से ट्रैवल इंश्योरेंस लेना बेहद जरूरी है।

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