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पिता की नई शादी ने तोड़ा घर, माँ-बेटी ने चुना मौत का रास्ता

पिता की नई शादी ने तोड़ा घर, माँ-बेटी ने चुना मौत का रास्ता

Bihar News: बिहार के नालंदा ज़िले के बिहार थाना क्षेत्र के पतुआना गांव में गुरुवार की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 27 वर्षीय महिला मालो देवी और उसकी छह साल की मासूम बेटी प्रिया की ज़हर खाने से मौत हो गई। यह सिर्फ दो जिंदगियों का अंत नहीं, बल्कि एक टूटे हुए रिश्ते, मानसिक प्रताड़ना और कथित साज़िश की कहानी भी है।

Bihar News: पड़ोसी के फोन से खुला राज

घटना की जानकारी सबसे पहले पड़ोसियों ने महिला के मायके वालों को दी। आनन-फानन में मां-बेटी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। गांव में मातम पसरा है और हर कोई यही पूछ रहा है—आख़िर ऐसा क्या हुआ कि एक मां ने अपनी बच्ची के साथ यह खौफनाक कदम उठा लिया?

Bihar News: आत्महत्या नहीं, हत्या का आरोप

मृतका के पिता इस घटना को आत्महत्या मानने से साफ इनकार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी बेटी और नातिन की हत्या की गई है। उन्होंने दामाद पिंटू कुमार और उसके परिजनों के खिलाफ थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। उनका कहना है कि मालो देवी लंबे समय से ससुराल में मानसिक दबाव और प्रताड़ना झेल रही थी।

साली से शादी और बढ़ता दबाव

परिजनों के अनुसार, पिंटू कुमार ने अपनी ही छोटी साली से प्रेम संबंध बनाकर उससे शादी कर ली थी। इस घटना ने मालो देवी को भीतर से तोड़ दिया। उसने पति के खिलाफ केस दर्ज कराया, जिसके चलते पिंटू कुछ समय के लिए जेल भी गया। हाल में वह लगातार केस वापस लेने का दबाव बना रहा था, जिसे लेकर पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद होता था।

Bihar News: पुलिस की दोहरी जांच

घटना की सूचना मिलते ही बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और आत्महत्या व हत्या दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है। परिजनों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।सवाल जो जवाब मांगते हैं क्या यह सचमुच मजबूरी में उठाया गया कदम था, या इसके पीछे कोई साज़िश छुपी है? क्या एक महिला को न्याय की लड़ाई लड़ने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी? नालंदा की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम के सामने खड़ा एक कड़ा सवाल है आख़िर कब तक रिश्तों की साज़िश में मासूम जिंदगियां यूं ही बुझती रहेंगी?

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