Home » स्वास्थ्य » पैरों में अचानक कमजोरी को न करें नजरअंदाज, जानें कब बन सकती है मेडिकल इमरजेंसी

पैरों में अचानक कमजोरी को न करें नजरअंदाज, जानें कब बन सकती है मेडिकल इमरजेंसी

Leg Weakness:

Leg Weakness: पैरों में कमजोरी हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। कई बार अधिक काम का दबाव, तनाव, डिहाइड्रेशन, जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज या शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी के कारण भी यह समस्या हो सकती है। खासतौर पर विटामिन B12, विटामिन D, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी से पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। सामान्य कारणों से होने वाली कमजोरी आराम और सही खानपान से ठीक हो जाती है।

Leg Weakness: नस दबने और कम एक्टिव रहने से भी बढ़ सकती है परेशानी-

रीढ़ की हड्डी की नस दबने या सायटिक नर्व पर दबाव पड़ने से पैरों में दर्द, झुनझुनी और कमजोरी हो सकती है। लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत आ सकती है।

Leg Weakness: ज्यादा वजन भी बन सकता है वजह-

विशेषज्ञों के अनुसार अधिक वजन का असर मांसपेशियों की ताकत पर पड़ता है। खासकर बुजुर्गों में मोटापा पैरों की कमजोरी और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

इन बीमारियों में भी दिख सकता है यह लक्षण-

डायबिटिक न्यूरोपैथी

स्लिप डिस्क

स्पाइनल स्टेनोसिस

नसों पर दबाव से जुड़ी समस्याएं

इन स्थितियों में पैरों में दर्द, सुन्नपन, जलन, झुनझुनी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कब बन सकती है मेडिकल इमरजेंसी-

इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

पैरों में अचानक कमजोरी शुरू हो जाए।

एक या दोनों पैरों की ताकत तेजी से कम होने लगे।

आराम करने के बाद भी कमजोरी बनी रहे।

चलने या खड़े होने में कठिनाई होने लगे।

स्ट्रोक का भी हो सकता है संकेत-

अगर पैरों की कमजोरी के साथ हाथों में कमजोरी, बोलने में परेशानी या चेहरा टेढ़ा होने जैसे लक्षण दिखें, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम है गंभीर स्थिति-

स्पाइन के निचले हिस्से की नसों पर अधिक दबाव पड़ने से कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम हो सकता है। इसमें कमर में तेज दर्द, पैरों में अचानक कमजोरी, पेशाब करने में दिक्कत या ब्लैडर कंट्रोल खत्म होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर नसों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी हो सकता है खतरनाक-

शरीर में पोटैशियम का स्तर बहुत कम या बहुत ज्यादा होने पर अचानक मांसपेशियों में कमजोरी आ सकती है। गंभीर मामलों में लकवे जैसी स्थिति भी बन सकती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं-

पैरों के साथ हाथों में भी कमजोरी महसूस हो।

बोलने या समझने में परेशानी हो।

ब्लैडर कंट्रोल खत्म हो जाए।

कमजोरी लगातार बढ़ती जाए।

कैसे होती है जांच-

डॉक्टर मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री जानने के बाद ब्लड टेस्ट, ब्लड शुगर, विटामिन B12, विटामिन D, थायराइड प्रोफाइल, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

क्या है इलाज-

अगर समस्या सामान्य कारणों से है तो संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, विटामिन सप्लीमेंट्स, फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम, शुगर कंट्रोल और वजन कम करने से राहत मिल सकती है। वहीं नसों पर अधिक दबाव या गंभीर बीमारी होने पर दवाओं, इम्यूनोथेरेपी या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है

यह भी पढ़े- आकिब नबी की अनकही कहानी, गेंदबाजी करने के लिए दोस्तों से मांगे जूते उधार