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राहुल के बयान पर संसद में मचा घमासान, किन मंत्रियों ने जताया विरोध?

राहुल के बयान पर संसद में मचा घमासान, किन मंत्रियों ने जताया विरोध?

Union Budget 2026: Union Budget के दौरान लोकसभा में सोमवार को उस वक्त जबरदस्त हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम विवाद का जिक्र करते हुए पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला दे दिया। राहुल का यह बयान सुनते ही सत्ता पक्ष की ओर से तीखी आपत्ति दर्ज कराई गई और सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया।

Union Budget 2026: डोकलाम पर बयान और बढ़ता विवाद

राहुल गांधी ने अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा कि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए हैं। इसी के जवाब में उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की आत्मकथा का जिक्र करना शुरू किया। राहुल ने दावा किया कि पुस्तक में डोकलाम और कैलाश रेंज से जुड़े गंभीर तथ्य लिखे हैं, जिनसे सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।लेकिन राहुल जैसे ही उस कथित पुस्तक की पंक्तियां पढ़ने लगे, वैसे ही सत्ता पक्ष की बेंचों से विरोध शुरू हो गया।तीन-तीन मंत्री एक साथ खड़े होकर राहुल को रोकने के लिए सामने आए। राजनाथ सिंह, अमित शाह और किरेन रिजिजू —तीनों वरिष्ठ मंत्रियों ने राहुल के बयान को सदन के नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया।

Union Budget 2026: राजनाथ सिंह का सख्त रुख

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिन मुद्दों का उल्लेख नहीं है, उन पर चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने साफ कहा कि जिस पुस्तक का हवाला राहुल गांधी दे रहे हैं, वह कभी प्रकाशित ही नहीं हुई। ऐसे में उस पर आधारित बयान देना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

अमित शाह की आपत्ति

गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को यह स्पष्ट करना होता है कि वह जिस दस्तावेज़ या पुस्तक का हवाला दे रहा है, वह आधिकारिक रूप से प्रकाशित है या नहीं। बिना छपी किताब से पढ़ना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

Union Budget 2026: किरण रिजिजू ने दिलाए नियम

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा नियमों से चलती है, किसी अप्रमाणित और अप्रकाशित सामग्री को सदन में पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसे स्पष्ट नियम उल्लंघन बताया।

सरकार की आपत्ति की असली वजह

सरकार की मुख्य आपत्ति राहुल गांधी के रेफरेंस को लेकर रही। सत्ता पक्ष का कहना है कि जिस आत्मकथा का राहुल जिक्र कर रहे हैं, उसमें तथ्यों को लेकर गंभीर आपत्तियां थीं, इसी वजह से उसे प्रकाशित नहीं होने दिया गया। ऐसे में उस सामग्री को संसद में पढ़ना न सिर्फ गलत है, बल्कि सदन को गुमराह करने जैसा भी है।राजनीतिक गर्माहट तेज इस पूरे घटनाक्रम के बाद लोकसभा में कुछ समय तक कार्यवाही बाधित रही। विपक्ष ने इसे बोलने की आज़ादी पर हमला बताया, जबकि सरकार ने नियमों और संसदीय मर्यादा का हवाला देकर अपना रुख सही ठहराया। कुल मिलाकर, डोकलाम का जिक्र और एक अप्रकाशित किताब का हवाला बजट सत्र के बीच बड़ा राजनीतिक तूफान बन गया, जिसने सत्ता और विपक्ष को आमने-सामने ला खड़ा किया।

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