UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘बयानों के दिग्गज’ माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे बड़ा और विवादित हमला बोलकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की सियासत में आग लगा दी है। लखीमपुर खीरी पहुंचे मौर्य ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए अखिलेश यादव की तुलना एक ऐसे ‘चेले’ से कर दी जिसका ‘गुरु ही अंधा’ हो।
मौर्य का सीधा प्रहार
मीडिया से बात करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य और उनकी समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने एक दोहे का जिक्र करते हुए कहा कि ‘जाका गुरु भी अंधला, चेला खरा निरंध।’ उन्होंने आगे कहा कि जब नेतृत्व (गुरु) के पास ही सही दृष्टि नहीं है, तो उसके पीछे चलने वाले चेले (अखिलेश) से क्या उम्मीद की जा सकती है? मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को यह तक नहीं पता कि राजनीति में पिछड़ों और दलितों का असली हक क्या है। वे केवल विरासत में मिली सत्ता का उपयोग कर रहे हैं, बिना किसी जमीनी विजन के।
UP Politics: PDA एक धोखा
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश के चर्चित ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की धज्जियां उड़ाते हुए उसे पूरी तरह फर्जी करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश का PDA गिरगिट की तरह रंग बदलता है। मौर्य ने आरोप लगाया कि जब टिकट देने की बारी आती है, तो अखिलेश को PDA याद नहीं आता, और जब अपनी पत्नी डिंपल यादव को चुनाव लड़ाना होता है, तो उन्हें PDA का हिस्सा बता देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो नेता दलितों और पिछड़ों के हक के लिए सड़क पर नहीं उतर सकता, उसे PDA बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वहीं नेशनल लेवल पर यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य कभी अखिलेश के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाते थे। उनका इस तरह खुलकर ‘निजी हमले’ पर उतर आना यह दर्शाता है कि सपा के भीतर पिछड़ों के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी हो चुकी है। मौर्य के इस बयान ने भाजपा को भी बैठे-बिठाए हमला करने का मौका दे दिया है।
2027 की जंग हुई और भी तीखी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब अपनी नई पार्टी के जरिए अखिलेश यादव के मूल वोट बैंक को निशाना बना रहे हैं। लखीमपुर खीरी से शुरू हुई यह बयानबाजी अब दिल्ली के गलियारों में चर्चा का विषय है। क्या अखिलेश यादव इस ‘निजी हमले’ का जवाब देंगे या इसे नजरअंदाज करेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Report BY: संजय कुमार
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