Parliament News: संसद भवन परिसर में बीते दिन बुधवार को हुए दो अलग-अलग घटनाक्रमों ने दिनभर राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी। पहला मामला कांग्रेस सांसद शशि थरूर से जुड़ा रहा, जबकि दूसरा घटनाक्रम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक को लेकर सामने आया।
थरूर का बिगड़ा संतुलन
संसद परिसर में सामने आए एक वायरल वीडियो में कांग्रेस सांसद शशि थरूर फोन पर बात करते हुए सीढ़ियों से उतरते समय लड़खड़ाते नजर आए। जैसे ही उन्होंने सीढ़ी पर कदम रखा, उनका संतुलन बिगड़ गया। उस समय उनके पास खड़े समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तुरंत उन्हें संभाल लिया। वीडियो में अखिलेश यादव थरूर की मदद करते हुए उनका हाथ पकड़कर कुछ सीढ़ियां उतरते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई।
Yes thanks to @yadavakhilesh, @Imranmasood_Inc and others who came to help as I hobbled off.
Took a bit of a tumble by missing a step when coming down the Parliament stairs. A bit of pain still, but I don’t think I’ve broken anything, just twisted the ankle and bruised some… https://t.co/gDhMMV8cu9
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 4, 2026
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर शशि थरूर के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं जताई जाने लगीं। हालांकि, इन अटकलों पर विराम लगाते हुए खुद शशि थरूर ने वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने एक्स पर पोसेट कर लिखा कि “जिस दीए को तूफां में जलना होगा, उसे संभल-संभल के चलना होगा. मैं ठीक हूं.” थरूर के इस बयान के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
Parliament News: राहुल ने बिट्टू को कहा ‘गद्दार’
इसी दिन संसद परिसर में एक और घटनाक्रम ने सियासी माहौल गरमा दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान राहुल गांधी ने बिट्टू को ‘गद्दार’ कहा। हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन रवनीत सिंह बिट्टू बिना हाथ मिलाए वहां से चले गए। इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला है। दिल्ली के सात भाजपा सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के बयान को निंदनीय बताते हुए आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की टिप्पणी से सिख समुदाय की अस्मिता को ठेस पहुंची है। फिलहाल, संसद परिसर में हुए इन दोनों घटनाक्रमों ने एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी और चर्चाओं को तेज कर दिया है।







