UP News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव में प्रशासन ने आज एक बार फिर सख्ती दिखाते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया। जिले में प्रशासन की यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद की गई। करीब 300 वर्गगज क्षेत्र में बनी यह मस्जिद लंबे समय से विवाद का विषय बनी हुई थी और अब कोर्ट ने इसे अवैध मानते हुए हटाने का आदेश जारी किया।
गांव हुआ छावनी में तब्दील
जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बुलडोजर और अन्य आवश्यक संसाधनों के साथ कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। पिपरिया गांव को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया था। मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात रही, वहीं पीएसी के जवानों ने भी सुरक्षा में योगदान दिया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। इस दौरान किसी भी तरह के विरोध या हंगामे की सूचना नहीं मिली। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि अवैध निर्माण के खिलाफ कानून के तहत की गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद चला बुलडोजर
जानकारी देते हुए एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने बताया कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी थी, वह राजस्व अभिलेखों में ‘बंजर’ (श्रेणी 5) और सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी। गाटा संख्या 1474 वाली इस जमीन पर अवैध निर्माण किया गया था। इस मामले की कानूनी लड़ाई साल 2008 से चल रही थी। तहसीलदार कोर्ट ने पहले ही बेदखली के आदेश जारी कर दिए थे, और सिविल कोर्ट में भी पक्षकारों का मुकदमा खारिज हुआ। अदालत से राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
एसडीएम का कहना है कि बेदखली की प्रक्रिया में जुर्माने का प्रावधान भी होता है, जिसे पक्षकारों ने पहले ही जमा कर दिया था। सिविल कोर्ट में मामला लंबित रहने के कारण कार्रवाई रोक दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसे पूरा किया गया।







