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जंगल का मजबूती का प्रतीक, विशाल कद और अद्भुत ताकत

भारत के जंगलों में कई जीव-जंतु अपनी विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इनमें से एक गौर है, जिसे इंडियन बाइसन के नाम से भी जाना जाता है। संरक्षण की दृष्टि से गौर को कई स्तरों पर सुरक्षा प्राप्त है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में इसे 1986 से संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।

Indian bisan: भारत के जंगलों में कई जीव-जंतु अपनी विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इनमें से एक गौर है, जिसे इंडियन बाइसन के नाम से भी जाना जाता है। इसे जंगल का मजबूत सिपाही या पारिस्थितिकी तंत्र का रक्षक कहा जाता है। यह जानवर अपनी भारी-भरकम और मज़बूत काया, गहरे भूरे से काले रंग और मजबूत शारीरिक संरचना के लिए प्रसिद्ध है। इसके पैरों पर सफेद मोजे जैसे निशान इसकी पहचान बनाते हैं। गौर स्वभाव से काफी शर्मीला होता है, लेकिन इसकी ताकत इतनी अधिक होती है कि जंगल के बड़े शिकारी जैसे बाघ या शेर भी अकेले इसका सामना करने से बचते हैं।

पूरी तरह से है शाकाहारी

इस शक्तिशाली जानवर की खास बात यह है कि यह पूरी तरह से शाकाहारी होता है और मुख्यतः घास, बांस की पत्तियों और अन्य वनस्पतियों का सेवन करता है। इंडियन बाइसन बिहार का राज्य पशु है, जहां इसकी सबसे बड़ी आबादी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पाई जाती है। यहां बेहतर घास के मैदान, प्रभावी संरक्षण प्रयासों और नियमित रखरखाव के कारण गौर की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि न केवल इस क्षेत्र बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

Indian bisan: जंगल का सबसे ताकतवर जानवर

एक वयस्क नर गौर बहुत विशाल होता है। इसका वजन 600 से 1,000 किलोग्राम या उससे अधिक हो सकता है, और इसकी कंधे तक की ऊंचाई लगभग 2 मीटर तक पहुंचती है। इसी कारण इसे जंगल का सबसे ताकतवर जानवर माना जाता है। भारत में गौर मुख्यतः पश्चिमी घाट, मध्य भारत और उत्तर-पूर्व के घने जंगलों में पाया जाता है। नागरहोल, मुदुमलाई और बांदीपुर जैसे क्षेत्र इसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित

Indian bisan: संरक्षण की दृष्टि से गौर को कई स्तरों पर सुरक्षा प्राप्त है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में इसे 1986 से संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। भारत सरकार ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में शामिल किया है, जो इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। दिलचस्प बात यह है कि गौर गोवा और बिहार का राज्य पशु भी कहलाता है। पालतू रूप में इसे ‘गायल’ या ‘मिथुन’ कहा जाता है। गौर की उपस्थिति जंगलों की स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाती है।

 

Written by: Yamini Yadav

 

 

 

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