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अमेरिका-ईरान के बीच तनाव: ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार कचीनर रहा है अमेरिका प्रशासन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सैन्य विकल्पों पर विचार और परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है। चीन और रूस की भूमिका भी इस संकट में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति

US-Iran tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ सकता है। खबरों के अनुसार, Donald Trump ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कूटनीति यानी बातचीत दोनों देशों के बीच आखिरी कोशिश हो सकती है। वहीं, ईरान के करीबी सहयोगी चीन और रूस किसी भी संभावित अमेरिका-ईरान संघर्ष में सीधे सैन्य मदद देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति
ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति

ट्रंप प्रशासन ईरान विकल्पों पर विचार

पिछले कुछ समय से यह खबरें आ रही हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर कार्रवाई के विकल्पों पर सोच रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान कई सालों से चीन और रूस के साथ मजबूत सैन्य संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ये दोनों देश आगे बढ़कर खुलकर साथ देने से बच रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति ईरान के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि इसे अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

US-Iran tensions: रूस-ईरान नौसेना अभ्यास से तनाव

हाल ही में रूस और ईरान की नौसेना ने ओमान की खाड़ी में छोटे स्तर का अभ्यास किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में भी चीनी जहाजों के साथ सैन्य अभ्यास की योजना बनाई जा रही है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रंप ईरान पर हमला करने का आदेश देते हैं, तो चीन और रूस सीधे सैन्य हस्तक्षेप करने में रुचि नहीं दिखाएंगे।

डैनी सिट्रिनोविज ने कहा कि ये देश ईरान के लिए अपने फायदे नहीं छोड़ना चाहेंगे। उनका मानना है कि वे ईरानी सरकार के गिरने की उम्मीद नहीं रखते, लेकिन अमेरिका के खिलाफ सैन्य स्तर पर टकराव से बचना चाहेंगे।

US-Iran tensions: ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति
ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति

परमाणु मुद्दे पर अमेरिका ईरान टकराव

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि द न्यूयॉर्क टाइम्स ने जानकारी दी है कि ट्रंप अपने सलाहकारों से बात कर रहे हैं। अगर कूटनीति या शुरुआती सीमित अमेरिकी हमले से ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करता है, तो ट्रंप बड़े स्तर के हमले पर भी विचार कर सकते हैं। इस हमले का लक्ष्य ईरान की सरकार को सत्ता से हटाना भी हो सकता है।

बताया जा रहा है कि संभावित निशानों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स मुख्यालय के साथ-साथ परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि उनका देश परमाणु अप्रसार संधि के तहत परमाणु ईंधन बनाने के अपने अधिकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति
ईरान पर अमेरिका की सैन्य रणनीति

सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका में बहस तेज

इसी बीच, अमेरिकी सीनेटर जेफ मर्कले  ने एकतरफा सैन्य कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो यह अमेरिकी संविधान का उल्लंघन होगा। इससे चल रही कूटनीतिक कोशिशें कमजोर हो सकती हैं और अमेरिकी सैनिकों और आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का फैसला लेने का कानूनी अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है।

एक अलग इंटरव्यू में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि ईरान को “इंडस्ट्रियल-ग्रेड बम” बनाने का सामान पाने में लगभग एक हफ्ते का समय लग सकता है। इस बयान के बाद व्हाइट हाउस पर जल्द कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।

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