Iran crisis: ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। खासकर सूरत की टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री, जिन्हें देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है, इस अनिश्चित माहौल में दबाव महसूस कर रही हैं। कुछ समय पहले तक निर्यात में सुधार के संकेत मिल रहे थे, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
टेक्सटाइल सेक्टर पर दोहरी मार
सूरत के टेक्सटाइल व्यापारियों का कहना है कि यहां से होने वाला बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों को निर्यात होता है। दुबई के जरिए 45 से ज्यादा देशों में सूरत का कपड़ा पहुंचता है। रमजान के दौरान भारी मात्रा में माल भेजा गया था, लेकिन ईरान-इज़रायल तनाव के कारण कई शिपमेंट रास्ते में अटक गए हैं। इससे करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सूरत से कुल कपड़ा निर्यात का करीब 20–30 प्रतिशत हिस्सा विदेशों में जाता है, जिसकी सालाना कीमत 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के बीच है। व्यापारियों का अनुमान है कि मौजूदा हालात में ही 5 से 7 हजार करोड़ रुपये के लेन-देन पर असर पड़ सकता है।
Iran crisis: कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का डर
सूरत देश के मैन-मेड फाइबर उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा तैयार करता है। युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिससे यार्न और फाइबर महंगे हो सकते हैं। इसका सीधा असर उत्पादन लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च पर पड़ेगा। अगर लागत बढ़ती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा भी कमजोर हो सकती है।
रोजगार पर भी मंडरा रहा खतरा
Iran crisis: व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो वर्कफोर्स में कटौती की नौबत आ सकती है। फिलहाल होली के चलते करीब 25 प्रतिशत मजदूर अपने गांव गए हुए हैं, जिससे उत्पादन पर दबाव कुछ कम है। लेकिन अगर बाजार में मंदी गहराती है, तो वापस लौटने वाले श्रमिकों के लिए रोजगार चुनौती बन सकता है। कुल मिलाकर, सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री फिलहाल इंतजार की स्थिति में है, उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य हों, वरना आर्थिक झटका बड़ा हो सकता है।
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