Gulf War Tension: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बात की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान और दूसरे देशों के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस स्थिति पर अपनी चिंता जाहिर की है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहराया
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि इस क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियां पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात का सबसे ज्यादा असर कमजोर और गरीब देशों पर पड़ता है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर होती है।
खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। सोमवार को तेल की कीमतों में 5.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगर होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही बंद हो जाती है, तो ऊर्जा की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव पड़ेगा।

Gulf War Tension: तनाव कम करने की अपील
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि गुटेरेस को इस बात की चिंता है कि हमले उन देशों तक फैल सकते हैं जो शुरू में इस संघर्ष का हिस्सा नहीं थे। इसमें खाड़ी देश, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान जैसे देश शामिल हैं, जहां संघर्ष बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
इस समय सबसे जरूरी बात यह है कि क्षेत्र में तनाव को कम किया जाए। गुटेरेस ने एक बार फिर अपील की है कि तुरंत लड़ाई रोकी जाए, हालात को और खराब होने से बचाया जाए और बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या का समाधान खोजा जाए।
एंटोनियो गुटेरेस खाड़ी नेताओं संग वार्ता
प्रवक्ता के अनुसार, गुटेरेस ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी और छह सदस्यीय खाड़ी सहयोग परिषद के राजदूतों से भी बात की।
कतर के अमीर के साथ हुई बातचीत में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई और यह भी कहा गया कि सैन्य तनाव को जल्द खत्म करके स्थिरता लाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
ओमान की मध्यस्थता पर गुटेरेस का धन्यवाद
ओमान के विदेश मंत्री के साथ बातचीत में गुटेरेस ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशों के लिए ओमान को धन्यवाद दिया। उन्होंने ईरान पर हमलों और खाड़ी देशों पर होने वाले ईरानी हमलों की भी निंदा दोहराई।
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर यह हमले जिनेवा में ईरान और इजरायल के बीच हुई आखिरी वार्ता के दो दिन बाद किए थे। यह वार्ता ओमान की मध्यस्थता से आयोजित की गई थी।
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