Green Energy India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि दुनिया की सप्लाई व्यवस्था में बदलाव हो रहा है और ऐसे समय में भारतीय कंपनियों के पास बड़ा मौका है। उन्होंने बताया कि जो भारतीय कंपनियां साफ और हरित ऊर्जा में निवेश करेंगी, वे दुनिया के बेहतर और बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं।
बजट से सतत विकास को मिलेगा बढ़ावा
बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल का केंद्रीय बजट देश की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और उसे और मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सतत विकास, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण मिशन बहुत महत्वपूर्ण हैं। अब जरूरी है कि सतत विकास को व्यापार की मुख्य रणनीति बनाया जाए। इस साल के बजट में इसके लिए मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है।
Green Energy India: वैश्विक बदलाव में भारत की विकास दौड़
इस योजना को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत, निवेशकों और अन्य लोगों को मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जमीन स्तर पर सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने नीति बनाने वालों और उद्योग क्षेत्र के लोगों से कहा कि वे सरकार के काम से जुड़े रहें और लगातार अपने सुझाव देते रहें।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वैश्विक सप्लाई व्यवस्था तेजी से बदल रही है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित भारत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य साफ है ज्यादा निर्माण करना, ज्यादा उत्पादन करना, आपसी संपर्क बढ़ाना और निर्यात को बढ़ावा देना।
हरित ऊर्जा परियोजनाओं को मिलेगा नया बजटीय समर्थन
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाकर 32,914 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें से 22,000 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सौर रूफटॉप योजना के लिए रखे गए हैं।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके और नवीकरणीय ऊर्जा को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। इसके अलावा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में भी 600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो पिछले साल के अनुमान के बराबर है।
विनिर्माण, एमएसएमई और शहरों का विकास फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और छोटे शहर भारत की विकास यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। केंद्रीय बजट के बाद आर्थिक वृद्धि को मजबूत बनाए रखने के मुख्य विषय पर चार अलग-अलग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
इन सत्रों में विनिर्माण और औद्योगिक सुधार, रणनीतिक क्षेत्र और उद्योग उन्नयन, एमएसएमई, वित्त और बाजार तक पहुंच, शहरों की आर्थिक प्रगति, और बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स तथा माल परिवहन जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बजट में किए गए सुधार औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा बेहतर करने और रोजगार के नए अवसर बनाने में कैसे मदद कर सकते हैं।






