Trump legal case controversy: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हमले में मौत के बाद पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई है. सवाल उठ रहा है कि क्या किसी देश का राष्ट्रपति दूसरे देश के शीर्ष नेता को मारने का आदेश दे सकता है और क्या इसके लिए उस पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई हो सकती है.
क्या ट्रंप को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
28 फरवरी को तेहरान में हुई मिसाइल स्ट्राइक ने दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत हो गई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुई इस कार्रवाई को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम भविष्य के खतरे को रोकने के लिए उठाया गया था, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे राजनीतिक हत्या मान रहे हैं.
Trump legal case controversy:क्या यह संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है?
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश दूसरे देश की सीमा या स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग नहीं कर सकता.संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक किसी भी देश पर हमला केवल दो हालात में सही माना जाता है —
पहला, अगर हमला आत्मरक्षा में किया गया हो.दूसरा, अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इसकी अनुमति दी हो.इसी वजह से इस हमले को लेकर कई कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं.
Trump legal case controversy: क्या सुप्रीम लीडर को सैन्य लक्ष्य माना जा सकता है?
युद्ध से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि हमले आमतौर पर सैन्य ठिकानों या सैनिकों पर किए जाते हैं. किसी देश के शीर्ष नेता को सीधे निशाना बनाना सामान्य स्थिति में सही नहीं माना जाता. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध घोषित नहीं है, तो ऐसे हमले को गैरकानूनी हत्या भी माना जा सकता है.पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत को लेकर भी विवाद बढ़ गया है, क्योंकि वह किसी सैन्य पद पर नहीं थे.
क्या ‘भविष्य के खतरे’ का तर्क सही है?
डोनाल्ड ट्रंप और उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था और अमेरिका के लिए खतरा बन सकता था.लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस तरह के खतरे को साबित करना बहुत कठिन होता है. इसके लिए यह दिखाना जरूरी होता है कि खतरा बिल्कुल तुरंत और स्पष्ट था.
Trump legal case controversy:क्या ट्रंप पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में केस हो सकता है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में ट्रंप के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चल सकता है.दरअसल अमेरिका इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का सदस्य नहीं है, इसलिए सीधे तौर पर उस पर कार्रवाई करना आसान नहीं है.हालांकि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद चाहे तो इस मामले की जांच कराई जा सकती है, लेकिन अमेरिका के पास वीटो शक्ति भी है.
दुनिया के लिए क्यों बनी बड़ी चिंता?
खामेनेई की मौत के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि अगर ऐसे हमलों को सही मान लिया गया तो भविष्य में कोई भी ताकतवर देश अपने दुश्मन देश के नेता को निशाना बना सकता है.इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती मान रहे हैं.
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