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ईरान-इजरायल युद्ध से सबक, भारत ने तेज किया ‘शेषनाग’ और लो-कॉस्ट स्ट्राइक ड्रोन प्रोजेक्ट

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Drone project: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध में शाहेद ड्रोन की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। कम लागत में तैयार होने वाले ये ड्रोन बड़े नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन्हें गिराने के लिए अमेरिका और इजरायल को बेहद महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसी अनुभव का असर अब भारत में भी दिखाई दे रहा है, जहां लंबी दूरी के कम लागत वाले स्ट्राइक ड्रोन प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम किया जा रहा है।

किस स्टेज पर हैं भारत के नए ड्रोन

हाल ही में भारत के नए ‘शेषनाग’ ड्रोन की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें इसे हाईवे से लॉन्च करते हुए देखा गया है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट केएएल नाम का एक और ड्रोन भी विकसित किया जा रहा है, जिसे शाहेद जैसे ड्रोन की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि कम लागत वाले मानवरहित ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर हमला कर सकते हैं। यही वजह है कि भारत में भी ऐसे ड्रोन की टेस्टिंग और डेवलपमेंट तेज कर दी गई है। खास बात यह है कि इनकी टेस्टिंग हाईवे से लॉन्च जैसे ऑपरेशन के साथ हो रही है, ताकि युद्ध की स्थिति में इन्हें कहीं से भी तैनात किया जा सके।

Drone project: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

भारतीय सेना के भीतर अब यह समझ मजबूत हो गई है कि लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन भविष्य के युद्ध में बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। इसी को देखते हुए सेना इन्हें जल्द से जल्द ऑपरेशनल बनाना चाहती है। बेंगलुरु स्थित रक्षा स्टार्टअप न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) द्वारा विकसित शेषनाग-150 ड्रोन पर लगातार काम चल रहा है। इस ड्रोन ने करीब एक साल पहले अपनी पहली उड़ान भरी थी। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने इस स्टार्टअप को कुछ और ड्रोन क्षमताओं को विकसित करने का निर्देश भी दिया है। सेना का लक्ष्य स्वदेशी तकनीक पर आधारित लंबी दूरी के ‘स्वार्म अटैक’ यानी झुंड में हमला करने वाले ड्रोन तैयार करना है।

कितना खतरनाक है शेषनाग ड्रोन

Drone project: शेषनाग-150 की ऑपरेशनल रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जा रही है और यह पांच घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है। यह ड्रोन लक्ष्य के ऊपर मंडराते हुए रियल-टाइम निगरानी करने के साथ हमला भी कर सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह कम से कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ खुद ही दुश्मन के टारगेट की पहचान कर सकता है, उसे ट्रैक कर सकता है और हमला भी कर सकता है। इसके अलावा यह 25 से 40 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है, जो दुश्मन के ठिकानों, सैन्य वाहनों और सैनिकों को गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

 

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